गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:02 IST

मंत्रालय में 570 कर्मचारी वापस भेजे गए, मुख्यमंत्री कार्यालय का बड़ा फैसला

मंत्रालय की मंत्री आस्थापनाओं में शिफारिश और उधारी पर लगे 570 कर्मचारियों को मूल विभाग में भेज दिया गया है, मुदत खत्म होने के बाद यह कार्रवाई हुई।

मंत्रालय में 570 कर्मचारी वापस भेजे गए, मुख्यमंत्री कार्यालय का बड़ा फैसला
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मंत्रालय से एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंत्री आस्थापनाओं में शिफारिश, उधारी और मौखिक तौर पर नियुक्त किए गए 570 कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने का फैसला लिया है। यह सारे कर्मचारी तात्पुरते तौर पर मंत्रालय में लगाए गए थे।

मिली जानकारी के मुताबिक इन कर्मचारियों के लिए 10 सितंबर तक की मुदत दी गई थी। कल यह मुदत खत्म हुई और उसके अगले ही दिन इन्हें फौरन मूल विभाग में भेज दिया गया। मुदत खत्म होने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों को वापस भेजा है। चूंकि यह फैसला सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से लिया गया है, इसलिए आगे से नई नियुक्तियां भी अब मुख्यमंत्री कार्यालय पूरी तरह जांच-पड़ताल करके ही करेगा, ऐसी जानकारी सामने आई है।

इससे पहले जो कर्मचारी मंत्री आस्थापनाओं में काम कर रहे थे लेकिन मुदत खत्म होने पर भी मूल विभाग में हाजिर नहीं हुए थे, उनका सितंबर महीने का वेतन रोकने के ऑर्डर पहले ही दे दिए गए थे। अब मुदत खत्म होने के बाद इन सभी कर्मचारियों को फौरन मूल विभाग में रुजू होने के आदेश दिए गए हैं। खास बात यह है कि इसमें कुछ मंत्रियों के निजी सचिव भी शामिल बताए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार मंत्रियों की आस्थापनाओं में अधिकारी और कर्मचारियों की कुल 904 पदों की सीमा तय है। इनमें से 549 पद प्रतिनियुक्ति के जरिए भरे गए थे, जबकि 355 पद खाली रखे गए थे। लेकिन उधारी पर नियुक्त किए गए 570 अधिकारी-कर्मचारियों को मूल विभाग में वापस भेजे जाने से मंत्रियों के कार्यालय में मैनपावर घट गई है। इस फैसले से कुछ मंत्रियों में नाराजगी होने की चर्चा भी चल रही है।

मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राज्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यालयों में कितने कर्मचारी होने चाहिए, इसके लिए तय की गई पदमर्यादा को अब और सख्ती से लागू किए जाने की संभावना है। इससे मंत्री आस्थापनाओं पर एक्स्ट्रा मैनपावर पर लगाम लगने के संकेत मिल रहे हैं।

पहले मंत्रियों के कार्यालय में पसंद के अधिकारी और कर्मचारियों को नियुक्त किया जाता था। लेकिन अब इस नियुक्ति पर लगाम लगने से मंत्रियों में बेचैनी बढ़ी है। हालांकि यह फैसला मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से लिया गया है, इसलिए इसका विरोध तुलनात्मक रूप से सीमित रहा, ऐसी चर्चा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में है।

इस फैसले के बाद अब मंत्रियों के कार्यालय में नई नियुक्तियों की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। आगे से सिर्फ मंत्रियों की निजी पसंद के हिसाब से अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि संबंधित व्यक्ति की योग्यता, अनुभव और कार्यालय की असल जरूरत की जांच करने के बाद ही नियुक्ति की जाएगी। 570 कर्मचारियों को मूल विभाग में भेजने के फैसले के बाद आने वाले समय में मंत्री आस्थापनाओं पर नियुक्तियों की प्रक्रिया कितनी बदलती है, इस पर प्रशासनिक हलकों की नजर है।

मंत्री कार्यालय में नियुक्तियों की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका और अहम होने की चर्चा प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चल रही है। संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की योग्यता और कार्यालय की असल जरूरत की जांच करने के बाद ही नियुक्ति को मंजूरी दी जा सकती है। इसलिए आने वाले वक्त में मंत्रालय की मंत्री आस्थापनाओं में नियुक्तियों पर मुख्यमंत्री कार्यालय का सीधा अंकुश रहेगा या नहीं, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर टिकी है।

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