मानसून की वापसी शुरू, फिर भी विदर्भ-मराठवाड़ा में 28 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट
बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के चलते महाराष्ट्र में मानसून की वापसी के बीच फिर तेज बारिश की चेतावनी दी गई है।
पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून ने वापसी शुरू कर दी है, लेकिन महाराष्ट्र के लिए फिलहाल राहत की खबर नहीं है। अगले 3 से 4 दिनों में राजस्थान, पंजाब और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों से मानसून की विदाई और तेज होने के लिए मौसम अनुकूल बना हुआ है, मगर इसी बीच बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र की वजह से महाराष्ट्र में एक बार फिर बारिश जोर पकड़ सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर विदर्भ और मराठवाड़ा में देखने को मिलने की संभावना है।
मौसम विभाग ने इन दोनों क्षेत्रों में मध्यम से तेज बारिश का अनुमान जताया है। साथ ही राज्य के अलग-अलग जिलों में 23 सितंबर तक गरज-चमक, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
मानसून की वापसी की प्रक्रिया इस बार सामान्य से दो दिन देरी से, 19 सितंबर को राजस्थान के कुछ हिस्सों से शुरू हुई, जबकि आमतौर पर यह सिलसिला 17 सितंबर से ही शुरू हो जाता है। उधर उत्तर अंडमान सागर और उसके आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण की वजह से उसी इलाके में एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई गई है।
बंगाल की खाड़ी में हो रहे इस मौसमी बदलाव का असर महाराष्ट्र में भी दिखने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक 25 सितंबर तक महाराष्ट्र और गोवा में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे राज्य के कई जिलों को राहत मिल सकती है और भीतरी इलाकों में भी बारिश तेज हो सकती है।
22 सितंबर तक सांगली, सातारा, कोल्हापुर और पुणे जिलों में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले 21 सितंबर को नासिक में मध्यम बारिश हुई, जबकि अहिल्यानगर, मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों में भी मध्यम बारिश का अनुमान था। 22 सितंबर को मराठवाड़ा में बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है।
21 से 28 सितंबर के बीच महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी बारिश होने का अनुमान है। मानसून के आखिरी दौर में हो रही यह बारिश कई इलाकों में सूखे जैसे हालात से राहत दिला सकती है और किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
मानसून के इस अंतिम चरण की बारिश महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों के लिए काफी अहम मानी जा रही है। इससे जल स्रोतों में पानी का स्तर बढ़ेगा और साथ ही यह बारिश खरीफ की फसलों के लिए संजीवनी की तरह काम करेगी, जिससे स्थानीय किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।