मलबार हिल के बाणगंगा तालाब में सैकड़ों मछलियां मरीं, पिंडदान का सड़ा खाना वजह बताया जा रहा
दक्षिण मुंबई के बाणगंगा तालाब में मरी मछलियां तैरती मिलीं। स्थानीय लोगों ने पिंडदान के अन्नपदार्थ सड़ने को वजह बताया है।
दक्षिण मुंबई के मलबार हिल इलाके में बाणगंगा तालाब है। यह ऐतिहासिक और पौराणिक तालाब है और इसे विरासत का दर्जा भी मिला हुआ है। अब इसी तालाब में सैकड़ों मछलियों के तड़पकर मर जाने की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पानी में बड़ी तादाद में मरी हुई मछलियां तैरती दिखीं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
स्थानीय रहिवासियों ने सीधा आरोप लगाया है कि तालाब में नियमित रूप से होने वाले धार्मिक विधि और पिंडदान की वजह से पानी बहुत ज्यादा गंदा हो गया है और इसी से मछलियों की जान गई। इस मामले से आसपास के लोगों में भारी गुस्सा है और पालिका के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बाणगंगा तालाब का शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक जिंदगी में खास महत्व है। इसलिए रोज सैकड़ों श्रद्धालु यहां पितृकार्य, श्राद्ध और पिंडदान करने आते हैं। इन विधियों के दौरान आटे के गोले, चावल, तिल और दूसरी खाने की चीजें तालाब में विसर्जित की जाती हैं। ये खाने की चीजें तली में जमा होकर बड़े पैमाने पर सड़ गई हैं। इन जैविक चीजों की वजह से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिर गई है।
तालाब के पानी पर मरी मछलियां दिखते ही स्थानीय लोगों ने खुद आगे आकर पानी में उतरकर सफाई शुरू कर दी। उन्होंने मरी मछलियां चुनकर किनारे पर लाईं, तो कुछ ही देर में प्लास्टिक के कई बड़े क्रेट मरी मछलियों से लबालब भर गए। इसके अलावा पानी के नीचे से आटे के न सड़े गोले और खाने की चीजों की परत दर परत बाहर निकाली गई। लोगों को डर है कि अगर ये मरी मछलियां वक्त पर नहीं हटाई गईं, तो इलाके में तेज बदबू फैलेगी और बीमारियां फैल सकती हैं।
नागरिकों का आरोप है कि मुंबई महानगरपालिका का स्वास्थ्य और जलसंधारण विभाग इस ऐतिहासिक जगह की देखभाल की तरफ पूरी तरह ध्यान नहीं दे रहा। लोगों का कहना है कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए भी तालाब की जैव विविधता को बचाना बहुत जरूरी है।
इसके लिए मांग की जा रही है कि धार्मिक विधि और पिंडदान के लिए तालाब के बाहर अलग से कृत्रिम कुंड बनाए जाएं। साथ ही तालाब के मूल पात्र में खाने की चीजें और निर्माल्य डालने पर सख्त पाबंदी लगाई जाए, और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग उठ रही है।