महाराष्ट्र समेत 18 राज्य रेड जोन में, लौटते मानसून से भी बारिश की उम्मीद कम
मौसम विभाग के मुताबिक महाराष्ट्र से मानसून की वापसी 5 से 10 अक्टूबर के बीच होगी, पर बारिश की गुंजाइश कम है। पश्चिम विदर्भ में हालत और खराब है।
मानसून की वापसी शुरू हो गई है। लौटता मानसून पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों को पार कर चुका है। महाराष्ट्र से इसकी विदाई 5 से 10 अक्टूबर के बीच होनी है।
ज्यादातर बार लौटता मानसून जाते-जाते महाराष्ट्र में बारिश दे जाता है। लेकिन इस बार ऐसा होने की उम्मीद कम है। नागपुर वेधशाला (IMD) ने बताया है कि फिलहाल पूरे भारत पर प्रतिचक्रवात की स्थिति बनी हुई है। यह स्थिति बादलों को इकट्ठा नहीं होने देती। इसी वजह से लौटते मानसून से महाराष्ट्र में बारिश की संभावना नहीं बताई गई है।
कहा जा रहा है कि इसका नतीजा महाराष्ट्र के लोगों और खास तौर पर किसानों के लिए निराशा भरा रहेगा। एक तरफ राज्य सूखे की मार झेल रहा है, और अब आने वाला वक्त और मुश्किल होने का अंदेशा बढ़ गया है।
आंकड़ों के हिसाब से देश में अभी सिर्फ ओडिशा ऐसा राज्य है जहां औसत से ज्यादा बारिश हुई है। इसके उलट महाराष्ट्र समेत 18 राज्यों में बारिश की कमी 20 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी वजह से इन 18 राज्यों को रेड जोन में रखा गया है।
पश्चिम विदर्भ में हालत और भी बिगड़ी हुई है। अकोला और अमरावती जिलों में बारिश की कमी 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में तो बारिश हुई ही नहीं। औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश के चारों महीने सूखे निकल गए। राज्य के कई इलाकों में डेढ़ महीने तक पानी की एक बूंद नहीं गिरी। कुछ जगहों पर बारिश हुई भी, तो वह तसल्ली देने लायक नहीं थी। इसी वजह से राज्य में बड़ा सूखा पड़ गया है।
मौसम विभाग के दावे के मुताबिक, एक दशक के बाद इस साल राज्य में सबसे कम बारिश दर्ज हुई है। इससे समझ आता है कि संकट कितना बड़ा है। इस साल राज्य में बारिश की औसत कमी 18 प्रतिशत है। राज्य के सभी विभागों में कम या ज्यादा, बारिश की कमी बनी है।
बारिश कम होने से रबी की बुआई पर भी संकट खड़ा हो गया है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। आने वाले 5 से 6 दिनों में राज्य में चारों तरफ बारिश होने की संभावना कम है। ऐसे में एस.डी. सानप ने सलाह दी है कि राज्य के किसान कृषि विभाग की सलाह लेकर ही रबी के मौसम में बुआई करें।