मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:59 IST

महंगी चीज खरीदनी है? EMI लें या पूरा पेमेंट करें, समझ लें फायदा-नुकसान

त्योहारी सीजन में महंगे सामान की खरीदारी बढ़ने के साथ EMI और फुल पेमेंट में से क्या चुनें, इस पर जरूरी बातें।

महंगी चीज खरीदनी है? EMI लें या पूरा पेमेंट करें, समझ लें फायदा-नुकसान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

त्योहारों का सीजन शुरू होते ही घर के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, लैपटॉप और कार जैसी महंगी चीजों की खरीदारी तेज हो जाती है। इस दौरान कंपनियां और बैंक EMI, नो-कॉस्ट EMI, कैशबैक, डिस्काउंट जैसे कई ऑफर लेकर आते हैं। ऐसे में लोगों के सामने अक्सर यह सवाल आता है कि महंगी चीज खरीदते वक्त पूरी रकम एक साथ भरें या EMI का रास्ता चुनें।

दोनों ही तरीकों के अपने फायदे और नुकसान हैं, इसलिए सिर्फ हर महीने कितनी EMI भरनी पड़ेगी, यह देखकर फैसला लेना ठीक नहीं। इसके बजाय यह देखना जरूरी है कि आपके पास कितनी बचत है, खरीदारी के बाद कितनी रकम बचेगी, आपकी कमाई कितनी स्थिर है, कर्ज पर ब्याज दर कितनी है और आगे चलकर कितने खर्च आने वाले हैं।

अगर किसी महंगी चीज को खरीदने में लगभग पूरी बचत खर्च हो रही हो, तभी EMI का ऑप्शन सोचा जा सकता है। जैसे मान लीजिए आपके पास 5 लाख की बचत है और आपको 3 लाख की कार, लैपटॉप या कोई और महंगी चीज खरीदनी है। पूरे 3 लाख एक साथ भरने पर हाथ में सिर्फ 2 लाख बचेंगे। अगर इस बची हुई रकम से इमरजेंसी खर्च, घर की जरूरतें या अचानक आने वाला बड़ा खर्च संभालना मुश्किल हो जाए, तो पूरी बचत खर्च करने की बजाय EMI लेना बेहतर हो सकता है। EMI लेने से पूरी रकम एक साथ नहीं देनी पड़ती और आपके हाथ में कैश या बचत कुछ हद तक बची रहती है।

लेकिन EMI चुनते वक्त सिर्फ महीने की किस्त कितनी है, यह देखना गलत हो सकता है। कर्ज पर ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, प्री-क्लोजर चार्ज और बाकी शुल्क मिलाकर पूरे कर्ज की अवधि में असल में कितनी रकम भरनी पड़ेगी, यह चेक करना जरूरी है। कम EMI पाने के लिए अगर आप कर्ज की अवधि बढ़ा देते हैं, तो महीने का बोझ कम लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि की वजह से कुल ब्याज ज्यादा लग सकता है। इसलिए छोटी EMI का मतलब हमेशा सस्ती खरीदारी नहीं होता।

वहीं अगर आपके पास पर्याप्त बचत है और पूरी कीमत भरने के बाद भी इमरजेंसी फंड और आगे के जरूरी खर्चों के लिए काफी रकम बची रहती है, तो फुल पेमेंट का रास्ता चुना जा सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कर्ज पर लगने वाला ब्याज बच जाता है और आगे हर महीने EMI भरने की जिम्मेदारी भी नहीं रहती, जिससे मासिक कमाई पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।

जैसे मान लीजिए किसी चीज की कीमत 2 लाख रुपये है। फुल पेमेंट में सीधे 2 लाख देने होंगे। लेकिन वही चीज EMI पर लेने में ब्याज और बाकी शुल्क मिलाकर कुल खर्च 2.25 लाख रुपये हो जाए, तो दोनों तरीकों का आखिरी खर्च आपस में मिलाना जरूरी है। इस उदाहरण में फुल पेमेंट चुनने पर करीब 25,000 रुपये का अतिरिक्त खर्च बच सकता है। लेकिन इतनी रकम भरने के बाद इमरजेंसी के लिए पर्याप्त बचत बची रहती है या नहीं, यह भी उतना ही मायने रखता है।

इसका कोई एक जवाब सबके लिए सही नहीं होता, यह हर किसी की आर्थिक हालत पर निर्भर करता है। अगर फुल पेमेंट करने के बाद भी बचत सुरक्षित रहती है, इमरजेंसी फंड मौजूद है और EMI लेने पर अतिरिक्त ब्याज या शुल्क देना पड़ रहा हो, तो पूरा पेमेंट करना फायदे का सौदा हो सकता है। दूसरी तरफ, अगर पूरी रकम भरने से बचत बहुत ज्यादा घट जाए, तो कम खर्च वाली EMI आपका कैश फ्लो संभालने में मदद कर सकती है, खासकर तब जब महंगी चीज खरीदने के बाद अचानक कोई बड़ा खर्च आ जाए।

त्योहारी सीजन में कंपनियां और बैंक कम EMI, नो-कॉस्ट EMI, कैशबैक या कम ब्याज दर जैसे ऑफर देते हैं। ये ऑफर देखने में अच्छे लगते हैं, लेकिन इनकी शर्तें ध्यान से पढ़ना जरूरी है। नो-कॉस्ट EMI में असल में कोई शुल्क तो नहीं लग रहा, प्रोसेसिंग फीस है या नहीं, कैशबैक और डिस्काउंट का हिसाब कैसे लगाया गया है, चीज की कैश कीमत और EMI में कुल कीमत में कितना फर्क है, इन सबकी तुलना करनी चाहिए। सिर्फ विज्ञापन में दिखाई छोटी मासिक EMI देखकर तुरंत खरीदारी का फैसला नहीं लेना चाहिए।

खरीदारी से पहले पांच बातें जरूर चेक कर लें। पहला, इमरजेंसी फंड, यानी खरीदारी के बाद कुछ महीनों के जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त रकम बची है या नहीं। दूसरा, कुल कर्ज खर्च, यानी सिर्फ EMI की रकम नहीं बल्कि ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और बाकी सभी शुल्क मिलाकर कुल कितने पैसे देने होंगे। तीसरा, कर्ज की अवधि, क्योंकि कम EMI के चक्कर में बहुत लंबी अवधि चुनने से कुल ब्याज बढ़ सकता है। चौथा, कमाई कितनी स्थिर है, अगर आमदनी में उतार-चढ़ाव रहता है तो लंबे समय तक EMI की जिम्मेदारी लेने से पहले ज्यादा सोच-विचार जरूरी है। पांचवां, यह देखना कि जरूरत असली है या सिर्फ ऑफर के लालच में खरीदारी हो रही है, सिर्फ त्योहारी ऑफर मिल रहा है इसलिए महंगी चीज EMI पर मत लें, पहले चीज की असली जरूरत और अपनी चुकाने की क्षमता देखें।

EMI हो या फुल पेमेंट, दोनों में से कोई भी अपने आप सही या गलत नहीं होता। कोई भी चीज खरीदने से पहले अपना इमरजेंसी फंड जरूर चेक करें। खरीदारी के बाद अगर पर्याप्त इमरजेंसी फंड बचा रहता है, तो कैश पेमेंट करना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए कुछ क्रेडिट कार्ड के ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है। इसलिए त्योहारी ऑफर का फायदा उठाते वक्त सिर्फ आज कितने पैसे देने हैं, यह नहीं बल्कि खरीदारी पूरी होने तक और उसके बाद कुल कितना खर्च होगा, इसका पूरा हिसाब लगाकर ही फैसला लेना चाहिए।

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