मढ-वर्सोवा केबल पुलाला हाईकोर्ट का हरी झंडी, 1237 मँग्रोव्ह काटने की इजाजत
मुंबई हाईकोर्ट ने मढ और वर्सोवा के बीच बनने वाले केबल-स्टेड पुल के लिए मैंग्रोव तोड़ने को मंजूरी दे दी है, जिससे डेढ़ घंटे का सफर सिर्फ पांच मिनट में पूरा हो सकेगा।
मुंबई के पश्चिम उपनगर में वर्सोवा से मढ के बीच लंबे अरसे से अटके केबल-स्टेड पुल के बांधकाम का रास्ता अब साफ हो गया है। मुंबई हाईकोर्ट के खंडपीठ ने इस प्रोजेक्ट के बीच में आ रहे 1 हजार 237 मैंग्रोव पेड़ काटने की इजाजत मुंबई महानगरपालिका को दे दी है। मुख्य न्यायमूर्ती महेश त्रिपाठी और न्यायमूर्ती अद्वैत सेठना की बेंच ने यह अहम फैसला पर्यावरण कानून और तमाम शर्तों का पालन करने की शर्त पर सुनाया है।
फिलहाल वर्सोवा से मढ जाने वालों को सड़क के रास्ते अंधेरी, जोगेश्वरी, ओशिवरा और मालाड होते हुए लंबा चक्कर काटना पड़ता है। मढ-मार्वे रोड मेन लिंक रोड से 12 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर होने की वजह से यात्रियों को भारी ट्रैफिक जाम झेलना पड़ता है। इस सफर में अभी पूरे डेढ़ घंटे लग जाते हैं। इसके अलावा फेरी बोट सर्विस भी चलती है, लेकिन ओहोटी के वक्त या रात में वह बंद रखनी पड़ती है। इन तमाम दिक्कतों को दूर करने के लिए करीब 2 हजार 395 करोड़ रुपये की लागत से 1 हजार 64 मीटर लंबा और चार लेन का यह केबल-स्टेड पुल बनाया जा रहा है।
पुल तैयार होने के बाद सफर की दूरी करीब 18 से 20 किलोमीटर तक कम हो जाएगी, और जो डेढ़ घंटे का मुश्किल सफर है वह सिर्फ पांच मिनट में पूरा हो सकेगा। महानगरपालिका ने कोर्ट में भरोसा जताया है कि इससे लोगों का काफी वक्त बचेगा, साथ ही न्यू लिंक रोड, पश्चिम द्रुतगती मार्ग और एस.वी. रोड पर होने वाले एक्सीडेंट और जाम में भी काफी कमी आएगी। यह पुल कोस्टल रोड और डेवलपमेंट प्लान (डीपी) के रोड्स से भी जुड़ेगा।
पर्यावरण की हिफाजत को लेकर महानगरपालिका ने कोर्ट में एक अहम गारंटी दी है। कोस्टल रेगुलेशन जोन (सीआरझेड) नोटिफिकेशन के मुताबिक, उत्तर कोकण मैंग्रोव डिवीजन के फॉरेस्ट अफसरों के अंडर आने वाले नौ हेक्टेयर एरिया में करीब 39 हजार मैंग्रोव के पेड़ नए सिरे से लगाए जाएंगे। महानगरपालिका ने इन 39 हजार पेड़ों को लगाने का वादा किया है। इन पेड़ों की अगले 10 साल तक सही देखभाल करने और बाकी जरूरी कामों के लिए 1 करोड़ 42 लाख रुपये का फंड पहले ही जमा कर दिया गया है।
पर्यावरण से जुड़ी सारी सरकारी मंजूरियां मिलने के बाद ही इस काम में तेजी लाई जा रही है। महानगरपालिका के इस बड़े प्रोजेक्ट से पश्चिम उपनगर में आना-जाना काफी तेज और आसान हो जाएगा, जिससे मुंबईकरों का सफर आसान होगा।