मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:38 IST

क्रिप्टो पर RBI गवर्नर मल्होत्रा की सावधानी, पर ब्लॉकचेन जैसी तकनीक को बढ़ावा

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत क्रिप्टोकरेंसी पर सावधान है, पर डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और टोकनाइजेशन जैसी तकनीकों को बढ़ावा देता है।

क्रिप्टो पर RBI गवर्नर मल्होत्रा की सावधानी, पर ब्लॉकचेन जैसी तकनीक को बढ़ावा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल तकनीक पर बैंक का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत ने सावधानी वाला रास्ता चुना है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और टोकनाइजेशन जैसी तकनीकों को वह बढ़ावा दे रहा है। गवर्नर की जिम्मेदारी संभालने के बाद क्रिप्टो पर यह उनका बयान है।

मल्होत्रा ने प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी से आर्थिक स्थिरता को खतरा बताया और कहा कि इस पर सख्त नियंत्रण की जरूरत है। उनके मुताबिक भारत क्रिप्टो एसेट से जुड़ी तकनीकी नई सोच का समर्थन करता है, जिसमें डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (डीएलटी) यानी विकेंद्रित डिजिटल लेजर तकनीक और टोकनाइजेशन शामिल हैं। लेकिन मौद्रिक संप्रभुता, मौद्रिक नीति और कैपिटल फ्लो से जुड़ी चिंताओं की वजह से क्रिप्टोकरेंसी पर भारत सावधान है।

डीएलटी एक डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें लेनदेन और दूसरी एंट्रियां एक ही जगह रखने के बजाय बांट दी जाती हैं। यानी वे एक नेटवर्क के कई कंप्यूटरों में साझा रहती हैं। टोकनाइजेशन एक प्रक्रिया है, जिसमें किसी भौतिक संपत्ति की या क्रेडिट और डेबिट कार्ड नंबर जैसे संवेदनशील डेटा की मालिकी को एक सुरक्षित डिजिटल कोड या टोकन में बदल दिया जाता है।

कौटिल्य आर्थिक परिषद में मल्होत्रा ने कहा, "तो हमारा नजरिया बुनियादी तकनीक को बढ़ावा देने का रहा है, और हम इनमें से कुछ तकनीकें सेंट्रल बैंक के भीतर और बाहर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPPs) के तहत इस्तेमाल कर रहे हैं। पर जहां तक क्रिप्टो का सवाल है, हमने सावधानी वाला रुख अपनाया है।"

क्रिप्टोकरेंसी की चिंताओं पर गवर्नर ने कहा कि ये "मौद्रिक मूल्य" से जुड़ी हैं, यानी पैसे की एकसमान कीमत से और मौद्रिक नीति पर उसके संभावित असर से। उनके मुताबिक इसका बड़ा असर खासकर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर हो सकता है, जहां कैपिटल फ्लो पर पाबंदियां हैं। उन्होंने कहा, "जिस समस्या को सुलझाने की कोशिश हो रही है, वह मुख्य रूप से देश के भीतर के पेमेंट की नहीं है, क्योंकि हमारे देश में और कई दूसरे देशों में घरेलू पेमेंट अब काफी तेज, सस्ते और सुविधाजनक हो गए हैं।"

मल्होत्रा ने कहा कि ज्यादा बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय पेमेंट की है, जिसके लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDCs) समेत दूसरे विकल्पों पर विचार हो सकता है।

बढ़ते वैश्विक सार्वजनिक कर्ज और चढ़ती बॉन्ड यील्ड पर उन्होंने कहा कि यील्ड में बदलाव मूल रूप से मांग और आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी और प्राइवेट सेक्टर का खर्च बढ़ रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से बढ़ा खर्च भी शामिल है। मल्होत्रा ने कहा, "पैसा सीमित है, खर्च बढ़ा है। सरकार और प्राइवेट कंपनियां, दोनों का खर्च बढ़ा है, जिसमें AI की भूमिका है। इससे बॉन्ड यील्ड और कर्ज बढ़ रहा है।"

गवर्नर के मुताबिक RBI की मौद्रिक नीति मुख्य रूप से देश की ग्रोथ और महंगाई पर केंद्रित है। हालांकि उन्होंने कहा कि वैश्विक ब्याज दरों का असर भारत पर भी पड़ता है, जिसमें देश की असली ब्याज दरों पर उनका असर भी शामिल है।

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