कोरपणा नगरपंचायत के सफाई कामगारों का शोषण, वेतन-पीएफ में गड़बड़ी का आरोप
कोरपणा नगरपंचायत के 17 प्रभागों में काम करने वाले कंत्राटी सफाई कामगारों ने पगार और पीएफ में हेराफेरी का आरोप लगाया है।
कोरपणा नगरपंचायत के 17 प्रभागों में पिछले कई सालों से कंत्राटी सफाई कामगार काम कर रहे हैं। शौचालय, घनकचरा साफ करने के साथ-साथ मरे हुए जानवर, कुत्ते और बिल्लियां उठाने का काम भी यही कामगार अपनी जान जोखिम में डालकर करते आए हैं। कामगारों का कहना है कि अनुसूचित जाति-जमाति के कामगारों का यहां सरेआम शोषण हो रहा है।
आरोप है कि नगरपंचायत में लाड-पागे समिति की रिपोर्ट को दबाकर रखा गया है, जिस वजह से कामगारों को नियम के मुताबिक उनके हक का पगार नहीं मिल पा रहा। कंत्राटदार ने भी बरसों से इन कामगारों को सुरक्षा किट तक नहीं दी है। कामगारों को यह तक नहीं पता कि 2016 से अब तक, यानी पिछले दस साल में, नगरपंचायत का कंत्राटदार कौन है। इतना ही नहीं, सफाई कामगार होने का पहचान पत्र भी उन्हें कभी नहीं दिया गया।
कामगारों के मुताबिक नगरपंचायत के पदाधिकारी मंजूर पगार पत्रक के हिसाब से पैसा नहीं दे रहे। मंजूरी 24 हजार रुपये की है, लेकिन कामगारों के हाथ में सिर्फ दस हजार पांच सौ रुपये ही आते हैं। कामगारों का आरोप है कि हर महीने होने वाले इस पगार घोटाले से साल भर में लाखों रुपये की गड़बड़ी की जा रही है। सफाई कामगार होने के नाते इनके वेतन से भविष्य निर्वाह निधी यानी पीएफ की कटौती नियमित रूप से होती है, लेकिन उनके खाते में वह रकम जमा ही नहीं होती, जिससे लाखों रुपये का पीएफ घोटाला सामने आया है।
कामगारों ने यह भी आरोप लगाया है कि नगरपंचायत के स्वच्छता निरीक्षक शंकर तांड्रा गैर विभाग की गतिविधियों में शामिल हैं। कामगारों को अपने बैंक खाते से पैसे निकालने का अधिकार नहीं है, बल्कि एक निजी बैंक में खाता खोलकर वहां से रकम निकाली जाती है। कामगारों ने साफ कहा है कि उन्होंने कभी बैंक जाकर पैसे नहीं निकाले, इसलिए बैंक का सीसीटीवी फुटेज जांचा जाए।
चरणदास पंधरे, सुधाकर आत्राम, दिगंबर सोळंके, आनंदराव आपटे समेत अन्य कामगारों ने अपनी शिकायत में कहा है कि जब भी वे अपने हक की बात करते हैं तो उन्हें गाली-गलौज सुननी पड़ती है। कामगारों को नगरपंचायत के काम के बजाय नगराध्यक्ष और नगरसेवकों के घर की खेती और जिनिंग का काम भी करना पड़ता है। कामगारों का कहना है कि पिछले दस साल में स्वच्छ भारत अभियान और घनकचरा प्रबंधन में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है, और नगरपंचायत के चार वाहनों में से सिर्फ दो वाहन ही घनकचरे की ढुलाई में लगे हैं, जबकि प्रशासन के अधिकारी इस पूरे मामले में सिर्फ तमाशा देख रहे हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश सचिव आबिद अली ने नगर विकास प्रशासन को दिए एक निवेदन में मांग की है कि जब तक शिकायत की जांच पूरी नहीं होती, तब तक कामगारों को नौकरी से निकालने की धमकी न दी जाए, और नगरपंचायत के मुख्याधिकारी इस मामले का संज्ञान लें। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच कर कामगारों को इंसाफ देने की मांग की है, वरना आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।