खडसंगी की विशेष ग्रामसभा में न सरपंच पहुंचीं, न ग्रामपंचायत अधिकारी, गांव वाले मांग रहे जवाब
चिमूर के खडसंगी में विशेष ग्रामसभा की नोटिस निकली और वक्त तय हुआ, लेकिन सभा के वक्त सरपंच और ग्रामपंचायत अधिकारी दोनों गैरहाजिर रहे।
चिमूर के खडसंगी ग्रामपंचायत में ग्रामसभा की नोटिस निकाली गई, वक्त तय हुआ और विषयपत्रिका में अहम मुद्दे भी लिखे गए। इसके बावजूद सभा के वक्त सरपंच और ग्रामपंचायत अधिकारी दोनों मौजूद नहीं थे। इससे खडसंगी ग्रामपंचायत के कामकाज पर सवाल उठ गए हैं।
शुक्रवार को दोपहर 12 बजे ग्रामपंचायत दफ्तर के आवारे में विशेष ग्रामसभा रखी गई थी। गांव में इसके आयोजन को लेकर चर्चा चल रही है। लोगों में उलझन है कि ग्रामसभा किसकी जिम्मेदारी पर होनी थी।
विषयपत्रिका में 'रिफॉर्म उत्सव', 'पीपल्स प्लॅन कॅम्पेन' (पीपीसी), विकसित भारत 2047 और महिला शेतकरी सक्षमीकरण जैसे मुद्दे रखे गए थे। खास तौर पर महिला किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, उनकी आर्थिक मजबूती के उपाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका पर बात होनी थी।
लेकिन सभा के आयोजन को लेकर ही साफ तस्वीर नहीं है। इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि विषयपत्रिका के मुद्दों पर असल में चर्चा हुई या नहीं, गांव वालों ने अपने सवाल रखे या नहीं और कोई फैसला लिया गया या नहीं।
ग्रामपंचायत अधिकारी कवडू तराळे ने कहा कि वरिष्ठों के आदेश पर ग्रामसभा की नोटिस वक्त पर निकाली गई थी। उनके मुताबिक उन्हें सिर्फ नोटिस निकालने को कहा गया था, जबकि ग्रामसभा लेने की जिम्मेदारी सरपंच की थी। तराळे ने कहा, "वरिष्ठों के आदेश के मुताबिक ग्रामसभा की नोटिस वक्त पर निकाली गई थी। हमें सिर्फ ग्रामसभा निकालने की सूचना दी गई थी। ग्रामसभा लेने की जिम्मेदारी सरपंच की थी। इसलिए ग्रामसभा लेने का काम सरपंच को करना था।"
दूसरी तरफ सरपंच प्रियंका कोलते ने बताया कि नोटिस वक्त पर निकाली गई थी, इसलिए उन्होंने उस पर दस्तखत नहीं किए। उन्होंने कहा, "विशेष ग्रामसभा की नोटिस वक्त पर निकाली गई, इसलिए मैंने उस पर दस्तखत नहीं किए। ऊपर से मेरी तबीयत भी ठीक नहीं थी, इसलिए मैं ग्रामसभा में नहीं आ सकी।"
दोनों की सफाई के बाद भी उलझन बनी हुई है। नोटिस निकालने से लेकर सभा की कार्रवाई पूरी करने तक की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी, गांव वाले यह साफ करने की मांग कर रहे हैं।
गांव के विकास के फैसलों, लोगों की दिक्कतों और सरकार की अलग-अलग योजनाओं पर बात करने के लिए ग्रामसभा को अहम मंच माना जाता है। ऐसे में विशेष ग्रामसभा की नोटिस निकलने के बाद भी कामकाज पर तस्वीर साफ न हो, तो गांव वालों की उम्मीदों का क्या होगा, यह सवाल उठ रहा है। महिला किसानों जैसे अहम मुद्दे पर असल में चर्चा हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी गांव वालों को मिलनी चाहिए।
अब गांव वालों की नजर इस पर है कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे या नहीं और ग्रामसभा के आयोजन पर जरूरी कार्रवाई होगी या नहीं।