खडसंगी ग्रामपंचायत के 29,800 रुपये के बिल में 'सुपारी' की एंट्री पर ग्रामीणों के सवाल
चिमूर के खडसंगी में धरना आंदोलन के बीच 29,800 रुपये का एक बिल सामने आया है, जिसकी एंट्रियों और इस्तेमाल पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।
चिमूर के खडसंगी ग्रामपंचायत के कामकाज को लेकर चल रहे धरना आंदोलन में अब 29 हजार 800 रुपये का एक बिल नया मुद्दा बन गया है। यह बिल 'साईराम किराना एंड जनरल स्टोर्स, खडसंगी' के नाम का है। बिल क्रमांक 437 है और उस पर ग्राहक के तौर पर ग्रामपंचायत खडसंगी लिखा है। ग्रामीण अब इस बिल में दर्ज सामान और उसके इस्तेमाल पर सवाल उठा रहे हैं।
बिल में तेल, चना, नमक, बिस्कुट और साबुन के साथ 'चिकन सुपारी' और 'कात्रा सुपारी' जैसी चीजें दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि यह खरीद आंगनवाड़ी के पोषण आहार के लिए की गई थी। लेकिन आंगनवाड़ी सेविका ने ही साफ कहा है कि उन्हें ये चीजें मिली नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठा है कि इस बिल का हिसाब आखिर कहां बैठता है।
सवालों की पूरी कतार खड़ी हो गई है। अगर खरीद आंगनवाड़ी के लिए थी, तो क्या सामान आंगनवाड़ी तक पहुंचा? और अगर खरीद ग्रामपंचायत के लिए थी, तो क्या इसके लिए ग्रामपंचायत की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ था? इन दोनों सवालों के जवाब कागजों में मिलने की उम्मीद की जा रही है।
बिल पर तारीख नहीं है और कुछ जगह वजन और दर की एंट्रियां अधूरी हैं। इसी वजह से खरीद की प्रक्रिया की जांच की मांग हो रही है। हालांकि सिर्फ बिल की एंट्रियों से गड़बड़ी साबित नहीं होती। इसलिए खरीद आदेश, प्रस्ताव पुस्तिका, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और संबंधित भुगतानों की जांच अहम होगी। खडसंगी ग्रामपंचायत की कथित आर्थिक गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर ग्रामीण और युवक पिछले 24 दिनों से ग्रामपंचायत दफ्तर के सामने धरने पर बैठे हैं।
ग्रामीण कुछ और संदिग्ध बिलों और कोरे बिलों के आधार पर नकद लेनदेन होने के आरोप भी लगा रहे हैं। इन आरोपों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है। बिल के सामान की असल खरीद हुई या नहीं, वह कहां इस्तेमाल हुआ और उसकी सक्षम मंजूरी थी या नहीं, यह कागजी जांच से ही पता चलेगा। तब तक ग्रामपंचायत के हिसाब की पारदर्शिता पर ग्रामीणों की नजर टिकी है।
ग्रामपंचायत सदस्य रुपचंद शास्त्रकार ने कहा, "मासिक सभा में किसी भी सामान की खरीद का फैसला नहीं हुआ है। फिर यह खरीद आखिर किसके फैसले से की गई, यह सवाल है। इसलिए मैं इस बिल से पूरी तरह असहमत हूं।"
खडसंगी की आंगनवाड़ी सेविका सुरेखा अथरगडे ने कहा, "यह खरीदा हुआ सामान हमें असल में मिला ही नहीं है। आंगनवाड़ी के लिए दिखाई गई कोई भी सुपारी भी हमें नहीं मिली। इसलिए बिल में लिखी खरीद के बारे में हमें जानकारी नहीं है।"
खडसंगी के ग्रामपंचायत अधिकारी कवडू तरारे ने कहा, "ये लेनदेन मेरे कार्यकाल में नहीं हुए हैं। इसलिए इनके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल ग्रामपंचायत का प्रभार मेरे पास है।"