काटोल नगराध्यक्ष अर्चना देशमुख को सुप्रीम कोर्ट में झटका, हाईकोर्ट की राहत पर रोक
जाति वैधता प्रमाणपत्र विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच का अंतरिम आदेश रोका, अगली सुनवाई 3 नवंबर को
काटोल नगर परिषद की नगराध्यक्ष अर्चना राहुल देशमुख की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके जाति वैधता प्रमाणपत्र को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, और वहां से उन्हें झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने जो अंतरिम राहत उन्हें दी थी, उस पर रोक लगा दी है। इसका मतलब यह है कि अब नगराध्यक्ष पद को लेकर उनके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।
पूरा मामला अर्चना देशमुख के कुणबी जाति के दावे से जुड़ा है। जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति ने 19 जून 2026 को उनका कुणबी जाति का दावा अमान्य कर दिया था। इसके बाद उन्होंने समिति के इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने फिलहाल जांच समिति के आदेश और उससे जुड़े आगे के आदेशों व अधिसूचनाओं पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत दे दी थी।
अब इसी राहत को नगराध्यक्ष पद की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार रहीं कल्पना उमप और कुछ अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश पर रोक लगाकर मामले को बिल्कुल नया मोड़ दे दिया है।
हाईकोर्ट में अर्चना देशमुख की तरफ से दलील दी गई थी कि जाति जांच समिति ने उनके परिवार से जुड़े पुराने जरूरी दस्तावेजों और विजिलेंस टीम की रिपोर्ट पर ठीक से गौर नहीं किया। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, उनके परिवार के पुराने कागजातों में कुणबी से जुड़ी एंट्री का भी हवाला दिया गया था, जबकि विरोध करने वाले पक्ष ने ऐसे दस्तावेज सामने रखे थे जिनमें परिवार के कुछ रिकॉर्ड में मराठा एंट्री होने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना था कि जांच समिति को कुछ अहम सबूतों पर और ठीक से विचार करने की जरूरत है, और इसी आधार पर समिति के फैसले पर अमल रोक दिया गया था।
यह पूरा विवाद काटोल नगर परिषद चुनाव के बाद शुरू हुआ था। नगराध्यक्ष पद OBC महिला वर्ग के लिए आरक्षित था और अर्चना देशमुख ने 2 दिसंबर 2025 को हुए चुनाव में इसी वर्ग से नामांकन भरा था। 21 दिसंबर 2025 को नतीजे आए तो वे करीब 2,300 वोटों के अंतर से जीत गई थीं। नामांकन के वक्त उन्होंने OBC कुणबी जाति का सर्टिफिकेट दिया था और तय समय में जाति वैधता प्रमाणपत्र देने का वादा किया था। इसके बाद उनके दावे की जांच शुरू हुई, समिति का फैसला आया और मामला कोर्ट तक जा पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में कल्पना उमप और अन्य की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी, अधिवक्ता मोहित खजांची और महेश धात्रक ने पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की अंतरिम राहत पर रोक लगाते हुए बाकी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
फिलहाल मामले का अंतिम फैसला नहीं हुआ है, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आगे भी चलती रहेगी। लेकिन इस आदेश के बाद काटोल नगर परिषद की नगराध्यक्ष अर्चना देशमुख के पद को लेकर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की गुंजाइश बढ़ गई है, और काटोल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सबकी निगाहें अब 3 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं।