कास पठार पर तीन दिनों में बीस हजार से ज्यादा पर्यटक, बदइंतजामी से लंबा ट्रैफिक जाम
सतारा के कास पठार पर लगातार तीन दिनों की छुट्टियों में भारी भीड़ जुटी, लेकिन वनविभाग और कास वनसमिति की अधूरी तैयारी की वजह से पार्किंग और ट्रैफिक में पूरी गड़बड़ हो गई।
सतारा के जागतिक धरोहर स्थल कास पठार पर अनंत चतुर्दशी से जुड़े शनिवार और रविवार की लगातार तीन छुट्टियों में हजारों पर्यटक फूलों को देखने पहुंचे, लेकिन वनविभाग और कास वनसमिति की अधूरी प्लानिंग की वजह से इंतजाम पूरी तरह गड़बड़ा गया। पार्किंग की सही व्यवस्था न होने और पुरजोर तैयारी की कमी की वजह से हजारों पर्यटकों को बेवजह परेशानी उठानी पड़ी।
तीन दिनों के लिए पहले से रिजर्व की गई तीन हजार पर्यटकों की ऑनलाइन बुकिंग पहले ही फुल हो गई थी। लेकिन इसके बावजूद एक साथ बड़ी तादाद में पर्यटक सीधे पठार पर पहुंच गए। अचानक आए इन पर्यटकों ने ऑफलाइन टिकट लेकर एंट्री ली। तीन दिनों में बीस हजार से भी ज्यादा पर्यटकों की भीड़ जुटने से पठार पर जत्रे जैसा नजारा दिखा।
वनविभाग और वनसमिति ने तीन दिनों में आए इतने बड़े पर्यटक समूह को कोई परेशानी न हो, इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से बड़ा ट्रैफिक जाम लग गया। पार्किंग के लिए जगह कम पड़ गई, तो वहीं फूलों वाली जगह के अंदर जाने के लिए पर्यटकों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं।
फिलहाल कास पठार पर लाल-गुलाबी तेरडा फूल अच्छे से खिला है, जिससे पूरा पठार लाल, गुलाबी, नीले और बैंगनी रंगों से भरा नजर आ रहा है। इसके साथ ही मिकी माउस, कंदील पुष्प, सोनकी, चवर, गेंद, नीली-बैंगनी मंजिरी, पाचगणी आमरी जैसी कुछ दुर्लभ किटकभक्षी फूलों की प्रजातियां भी इस बार पठार पर देखने को मिली हैं।
मशहूर कुमुदिनी तलाव में सफेद कमल भी खिलने शुरू हो गए हैं, जिसकी वजह से पर्यटकों की भीड़ इस तरफ भी खिंच रही है। राजमार्ग पर स्थित कुमुदिनी तलाव थोड़ा दूर होने की वजह से वहां तक जाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की सुविधा दी गई है। पर्यटक सौ रुपये प्रति व्यक्ति टिकट लेकर इलेक्ट्रिक वाहन से यह सफर तय कर रहे हैं। इस साल डेवलप किए गए कई नए पॉइंट्स पर भी अच्छी भीड़ देखी जा रही है, जिनमें मंडपघळ नाम का नया टूरिस्ट पॉइंट खासतौर पर पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
दूसरी तरफ पिछले पंद्रह दिनों से बारिश पूरी तरह थमी हुई है, जिसकी वजह से कास पठार पर फूलों की उम्र कम होने का खतरा मंडरा रहा है। कास पठार पत्थर की चट्टान से बना है और यहां मिट्टी की मात्रा बहुत कम है, जिसकी वजह से यह नमी को ज्यादा देर तक रोक नहीं पाता। बारिश के थम जाने और तेज धूप की वजह से पठार की जैवविविधता जल्दी सूखने का खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से इस बार पठार पर फूल हमेशा से पहले ही खत्म होने की संभावना जताई जा रही है।