कारवा में पुराना रास्ता बंद होने से भड़के ग्रामीण, कारवा-शिवणी मार्ग पर रास्ता रोको
ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प की सीमा पर बसे कारवा के करीब 300 महिला-पुरुषों ने मोहुर्ली गेट वाला पुराना रास्ता फिर खुलवाने के लिए शनिवार दोपहर रास्ता रोको किया।
नवरगाव: ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के कोअर और बफर क्षेत्र की सीमा पर बसे कारवा (तहसील सिंदेवाही) के ग्रामीण शनिवार दोपहर कारवा-शिवणी मार्ग पर उतर आए। उन्होंने रास्ता रोको आंदोलन किया। वजह यह है कि मोहुर्ली गेट होकर चंद्रपुर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है, जिसे गांव वाले बरसों से इस्तेमाल करते आ रहे थे। करीब 300 महिला-पुरुष इसमें शामिल हुए।
आंदोलन करने वालों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं तो वन अधिकारियों के लिए 'गांवबंदी' की जाएगी।
कारवा के लोग मोहली के रास्ते चंद्रपुर की तरफ आने-जाने के लिए इसी पुराने रास्ते का रोज इस्तेमाल करते थे। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग ने बिना कोई पहले से सूचना दिए यह रास्ता बंद कर दिया। अब उन्हें शिवणी होकर करीब 13 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है। इससे वक्त, पेट्रोल-डीजल और पैसा, तीनों ज्यादा लग रहे हैं। स्कूल-कॉलेज के बच्चे, किसान, मरीज और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने इस मसले पर वन प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए 14 जुलाई को ताडोबा के उपसंचालक को लिखित निवेदन दिया था। उनका आरोप है कि उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की इस अनदेखी से नाराज होकर शुक्रवार रात गांव की बैठक हुई और उसी में आंदोलन करने का फैसला लिया गया।
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि कारवा-मोहली-खुटवंडा-झरी-पेठ और मोहली गेट होकर चंद्रपुर जाने वाला पुराना रास्ता तुरंत पहले की तरह चालू किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने वन विभाग के विकास और संरक्षण के कामों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता देने और रोटेशन के आधार पर रोजगार देने की मांग की है। तीसरी मांग यह है कि कोअर क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमले में पशुधन का नुकसान हो तो टालमटोल किए बिना पीड़ितों को फौरन और सही मुआवजा दिया जाए।
गांव वालों में नाराजगी इस बात की भी है कि ताडोबा व्याघ्र प्रकल्प के पर्यटन से सरकार को बड़ा राजस्व मिलता है, जबकि जंगल की सीमा पर रहने वाले स्थानीय लोगों को ही आने-जाने के लिए 13 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है।
आंदोलन की अगुवाई लवकुश पुसाम, विनोद मडावी, किष्णा लेनगुरे, चरनदास मानकर और सुरेश आदे ने की। कारवा इलाके की महिलाएं, नौजवान और बुजुर्ग बड़ी संख्या में इसमें शामिल हुए।
अंधारी व्याघ्र प्रकल्प के कारवा के वनपरिक्षेत्र अधिकारी विनोद जांभुळे ने कहा कि ग्रामीणों की सभी मांगों की पूरी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत भेज दी गई है और जल्द ही वरिष्ठ स्तर से नियमों के तहत इसका हल निकाला जाएगा।