कांग्रेस ने मुंबई में जातिगत जनगणना और ओबीसी आरक्षण पर रखी अपनी बात, शिविर में किताब का विमोचन
मुंबई के टिळक भवन में ओबीसी प्रशिक्षण शिविर हुआ और 'मंडल विरुद्ध मनुवाद' किताब का विमोचन किया गया।
मुंबई में कांग्रेस के टिळक भवन मुख्यालय में ओबीसी कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर हुआ। इसी कार्यक्रम में 'मंडल विरुद्ध मनुवाद' किताब का विमोचन भी किया गया। कांग्रेस नेताओं ने यहां जातिगत जनगणना, सामाजिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण के मुद्दों पर अपनी राय रखी।
कांग्रेस के प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद ने कहा कि हर समाज को उसकी आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनका दावा है कि राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना का मुद्दा लगातार उठाया और उसके बाद केंद्र सरकार ने इस बारे में फैसला जाहीर किया।
प्रसाद के मुताबिक जाति व्यवस्था की वजह से समाज में अलग-अलग जातियों के बीच संघर्ष पैदा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी समाज को सामाजिक व्यवस्था में दूसरे दर्जे की जगह दी गई, और कहा कि इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। उनका कहना था कि हर समाज की सही आबादी सामने आने के बाद ही उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिल सकता है, और इसके लिए जातिगत जनगणना जरूरी है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने महाराष्ट्र में आरक्षण की मांगों को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा बढ़ाना और जातिगत जनगणना करना जरूरी है।
सपकाळ ने कहा कि महाराष्ट्र में कई समाज आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे हालात में, उनके आरोप के मुताबिक, मराठा और ओबीसी समाज के बीच संघर्ष पैदा हो रहा है। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की।
विधानमंडल में कांग्रेस पार्टी के नेता विजय वडेट्टीवार ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर बात की। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने ओबीसी के हक के लिए आवाज उठाई, और जातिगत जनगणना का जिक्र किया।
वडेट्टीवार ने बताया कि मंडल आयोग ने ओबीसी समाज के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी। उनके अनुसार यह आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर, और सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के लिए अहम है।
ओबीसी विभाग के प्रदेशाध्यक्ष प्रा. यशपाल भिंगे ने मंडल आयोग के पूर्व अध्यक्ष बी. पी. मंडल के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आयोग ने आंकड़ों के आधार पर ओबीसी समाज के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी।
भिंगे ने कहा कि ओबीसी समाज को सिर्फ वोट देने वाला तबका बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि नेतृत्व करने वाला समाज बनना चाहिए। उनके मुताबिक इसके लिए 'हर एक ओबीसी, बनेगा काँग्रेसी' का संकल्प लिया गया है। प्रा. भिंगे ने यह भी साफ किया कि 'मंडल विरुद्ध मनुवाद' किताब इस मकसद से लिखी गई है कि आम कांग्रेस कार्यकर्ता इस विषय को आसानी से समझ सकें।