कलमेश्वर MIDC से उद्योगों का पलायन रोकने की मांग, विधायक पोतदार से पहल की अपील
कलमेश्वर MIDC में उद्योगों को बचाने और नए उद्योग लाने के लिए शासन स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग उठी है।
कलमेश्वर MIDC में उद्योगों का विकास हो, जो उद्योग चल रहे हैं वे टिके रहें और नए उद्योग आएं, इसके लिए शासन स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग जोर पकड़ रही है। विधायक राजीव पोतदार से कहा गया है कि वे कलमेश्वर एमआईडीसी की समस्याएं शासन और संबंधित विभागों के सामने प्रभावी ढंग से रखें।
मांग करने वालों में धनंजय जोशी, अमर मोहिटे, दिलीप गजभिये और मोहन सौदागर शामिल थे। उन्होंने कहा कि उद्योगों को जरूरी सुविधाएं मिलें, करों में राहत दी जाए और औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए सही कदम उठाए जाएं। इन चारों ने विधायक पोतदार से इस दिशा में शासन स्तर पर पहल करने की मांग की।
सरकारी जिला निर्यात कार्ययोजना के मुताबिक कलमेश्वर औद्योगिक क्षेत्र में 170 औद्योगिक इकाइयों को भूखंड आवंटित हुए हैं। इनमें से 110 इकाइयां कार्यरत बताई गई हैं। लेकिन यह आंकड़ा पुराने सरकारी दस्तावेजों पर आधारित है। अक्टूबर 2026 में असल हालत क्या है, यह जानने के लिए एमआईडीसी से ताजा आंकड़े लेना जरूरी बताया गया है।
मांग करने वालों का कहना है कि अभी कितने उद्योग चल रहे हैं, कितने बंद हो चुके हैं और कितने दूसरी जगह चले गए हैं, इसकी पूरी जानकारी ली जानी चाहिए। उसके बाद ही समस्याओं का स्थायी हल निकल सकता है। उन्होंने एमआईडीसी से उद्योगों का पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के मौके बढ़ाने की जरूरत बताई।
उनके मुताबिक जब कोई जमे हुए उद्योग दूसरे औद्योगिक क्षेत्र में चले जाते हैं या उत्पादन बंद कर देते हैं, तो इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए पलायन के असली कारण पता करके उन्हें दूर करने की मांग की गई। साथ ही उद्योगों को सड़क, पानी, बिजली, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, परिवहन समेत दूसरी बुनियादी सुविधाएं देने पर खास ध्यान देने की बात कही गई।
उद्योगों को अलग-अलग करों और शुल्क में राहत देने, बिजली दरों में सहूलियत और दूसरे प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव पर शासन स्तर पर विचार करने का आग्रह भी किया गया। विधायक पोतदार के जरिए कलमेश्वर के औद्योगिक विकास का मुद्दा राज्य शासन और एमआईडीसी प्रशासन के सामने उठाने की मांग की गई है।
एमआईडीसी में फार्मास्युटिकल समेत कई क्षेत्रों में उद्योगों की संभावना देखते हुए इस क्षेत्र को फार्मा हब के रूप में विकसित करने पर विचार करने की मांग हुई। इसके अलावा कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, संतरा प्रसंस्करण और मेडिकल उपकरण निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए निवेश को बढ़ावा देने की बात रखी गई। उत्पादन लागत घटाने और नए निवेशकों को खींचने के लिए मौजूदा औद्योगिक नीति के तहत करों और शुल्कों में राहत, बिजली दरों में सुविधा जैसे उपाय करने की मांग भी की गई।
नए उद्योगों को जरूरी सुविधाएं देकर निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत भी जताई गई। उम्मीद जताई गई कि इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ेंगे और क्षेत्र के व्यापार को रफ्तार मिलेगी।