जयपुर की सीबीआई अदालत ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व मैनेजर को सुनाई 7 साल की सज़ा
3.61 करोड़ रुपये के लोन घोटाले में राम भरोसे मीणा को 7 साल की सख्त कैद और 2.85 लाख का जुर्माना, माखन लाल मीणा को 3 साल की कैद।
जयपुर की सीबीआई अदालत ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BOM) में हुए 3.61 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में बैंक के तब के मैनेजर राम भरोसे मीणा को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें 7 साल की सख्त कैद की सज़ा सुनाई और 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
इसी मामले में माखन लाल मीणा पर लगे आरोप भी अदालत में साबित हुए। उन्हें 3 साल की सख्त कैद और 25,000 रुपये के जुर्माने की सज़ा मिली है।
मामला 2016 का है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने 3 जून 2016 को लिखित शिकायत दी थी। इसी शिकायत के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने 9 नवंबर 2016 को केस दर्ज किया। शिकायत में कहा गया था कि उस वक्त के ब्रांच मैनेजर राम भरोसे मीणा ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया, धोखाधड़ी की और फर्जी कागज़ात के सहारे बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
आरोपों के मुताबिक 15 जनवरी 2015 से 6 मई 2015 के बीच मीणा ने 17 खातों में गैरकानूनी तरीके से लोन मंजूर कर दिए। न तो वैध लोन आवेदन लिए गए, न ज़रूरी कागज़ात, और न ही काफी सिक्योरिटी ली गई। सीबीआई के मुताबिक इस वजह से बैंक को 3.61 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 9 जुलाई 2020 को राम भरोसे मीणा और माखन लाल मीणा, दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट के बाद अदालत ने 1 दिसंबर 2021 को दोनों के खिलाफ आरोप तय किए और इसके साथ ही मामले की आगे की सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी की तरफ से अदालत के सामने आरोपों से जुड़े गवाह और सबूत पेश किए गए। सुनवाई पूरी होने पर जयपुर की सीबीआई अदालत ने दोनों को इस मामले में दोषी ठहराया।
आखिर में अदालत ने फैसला सुनाया कि राम भरोसे मीणा को 7 साल की कैद और 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा, जबकि माखन लाल मीणा को 3 साल की कैद और 25 हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा।