जयशंकर-अनिता आनंद मुलाकात, 2030 तक भारत-कनाडा व्यापार 70 अरब डॉलर करने का लक्ष्य
न्यूयॉर्क में UNGA-81 के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद की मुलाकात, दोनों देशों के बीच व्यापार और परमाणु ऊर्जा में साझेदारी बढ़ाने पर जोर।
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हो रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA-81) के मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों देशों ने आपसी रिश्ते और मजबूत करने पर बात की। पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच रिश्तों में जो उतार-चढ़ाव रहा है, उसके बाद अब दोनों तरफ से यह दिखाने की कोशिश हुई कि आर्थिक, सामरिक और तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी और बड़ी की जाएगी।
मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मुलाकात की फोटो और एक छोटा वीडियो शेयर किया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, "UNGA-81 के मौके पर कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद से मिलकर बहुत खुशी हुई। दोनों देशों के बीच रिश्तों को एक नए और ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिए हमारी बातचीत बहुत फलदायी और सकारात्मक रही।" यह मुलाकात औपचारिक रही, लेकिन इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दूर तक जाने वाला माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत अब व्यापार, रक्षा, हरित ऊर्जा, सुरक्षा और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में असली समझौतों में बदलने की प्रक्रिया तेज हुई है।
पिछले एक साल में भारत और कनाडा, दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के रिश्तों में काफी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में अनिता आनंद के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने एक साझा रणनीतिक खाका जारी किया था। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मुंबई और नई दिल्ली में उच्चस्तरीय मुलाकातें कीं, जिससे दोनों देशों के पुराने रिश्तों को फिर से नई जान मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग मजबूत करने के लिए एक साफ एजेंडे पर सहमति जताई थी।
इस रणनीतिक एजेंडे में दोनों देशों ने 2026 तक एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) पूरा करने का पक्का इरादा जताया है। कनाडा के विदेश मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, इस प्रस्तावित ऐतिहासिक समझौते के जरिए 2030 तक दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस बड़े समझौते में सिर्फ वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा, लोगों के बीच आपसी संपर्क और टिकाऊ विकास जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग भी शामिल है।
इन बेहतर होते रिश्तों में सबसे बड़ा और अहम हिस्सा है भारत और कनाडा के बीच रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी। दोनों देशों ने एलएनजी, एलपीजी, सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन और परमाणु ईंधन जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने का ऐलान किया है। इसमें सबसे बड़ी व्यापारिक कामयाबी है 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता। इस समझौते के तहत कनाडा की मशहूर कंपनी कैमेको (Cameco) 2027 से 2035 तक भारत की सिविल परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए करीब 22 मिलियन पाउंड यूरेनियम की सप्लाई करेगी। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और साफ ऊर्जा की तरफ कदम बढ़ाने के लिए यह समझौता बहुत अहम माना जा रहा है।
इसके अलावा दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध पर काबू पाने के लिए अपनी जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने का फैसला लिया है। कनाडा में पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में रह रहे 18 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोगों का हित बचाना और दोनों देशों के छात्रों को उच्च शिक्षा के अच्छे मौके देना, इस पर भी जयशंकर और अनिता आनंद की बैठक में खास जोर दिया गया। कुल मिलाकर, न्यूयॉर्क की इस उच्चस्तरीय बैठक से भारत और कनाडा के बीच जो कूटनीतिक दूरी थी, वह अब पूरी तरह खत्म होकर सहयोग का एक नया दौर शुरू हुआ है।