गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:02 IST

होर्मुझ की खाड़ी में अमेरिका का पनडुब्बी ड्रोन इराण के कब्जे में, जॉर्डन पर 20 मिसाइलों से हमला

तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमले के बाद इराण ने जॉर्डन के अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइलें दागीं और होर्मुझ की खाड़ी में अमेरिका का पनडुब्बी ड्रोन जब्त कर लिया।

होर्मुझ की खाड़ी में अमेरिका का पनडुब्बी ड्रोन इराण के कब्जे में, जॉर्डन पर 20 मिसाइलों से हमला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मिडल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। 9 सितंबर 2026 को अमेरिका और इराण के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी भयानक तरीके से भड़क उठी। ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने इराण के पांच बड़े तेल टैंकरों को सीधे निशाना बनाकर तबाह कर दिया। इसके कुछ ही घंटों बाद इराण ने पलटवार करते हुए जॉर्डन में अमेरिका के अहम सैन्य अड्डे पर 20 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला बोल दिया। इसके अलावा इराण ने दावा किया कि उसने होर्मुझ की खाड़ी में अमेरिकी सेना का बेहद संवेदनशील और आधुनिक पनडुब्बी ड्रोन जब्त कर लिया है, जिसके बाद दुनियाभर की राजनीति में हलचल मच गई।

पिछले 48 घंटों में ओमान की खाड़ी में तैनात एक अमेरिकी युद्धपोत पर इराणी सेना ने मिसाइल हमले की कोशिश की थी। इन हमलों का सख्त जवाब देने के लिए अमेरिका की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने एक ऑपरेशन चलाकर इराण के किविक, चारमिनार, होरायझन 1, रिएस्को और खारग द्वीप के पास खड़े दर्या नाम के इन पांच तेल टैंकरों पर पलटवार करके उन्हें तबाह कर दिया। हमले से पहले टैंकरों पर मौजूद कर्मचारियों को तुरंत वहां से निकलने की चेतावनी दे दी गई थी, इसलिए किसी की जान नहीं गई। लेकिन यह इराण की आर्थिक कमर तोड़ने की सीधी कोशिश मानी जा रही है।

अपने तेल टैंकरों पर हुए हमले का बदला लेने के लिए इराण के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने तुरंत जॉर्डन में अमेरिकी सेना का मुख्य अड्डा मानी जाने वाली अल-अज़राक बेस को निशाना बनाया। इराण की 20 अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों की वजह से पूरे इलाके में सायरन बजने लगे और धमाकों की आवाजें गूंजीं। जॉर्डन की सेना और वहां तैनात अमेरिकी हवाई सुरक्षा प्रणाली ने फौरन कार्रवाई करते हुए 18 मिसाइलें हवा में ही मार गिराईं। बाकी बची 2 मिसाइलें एक सुनसान इलाके में गिरीं, जहां कोई आबादी नहीं थी, इस वजह से बड़ा नुकसान टल गया और किसी की जान नहीं गई, ऐसा जॉर्डन की सेना ने साफ किया।

इस मिसाइल हमले से यह साफ हो गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सैन्य अड्डे अब सीधे इराण के निशाने पर आ गए हैं। इस सैन्य टकराव का असर वैश्विक बाजार पर तुरंत दिखा और ब्रेंट क्रूड तेल के दाम प्रति बैरल 98 डॉलर के पार चले गए, जिससे दुनियाभर में ईंधन की किल्लत का डर पैदा हो गया है।

इस पूरे टकराव की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि होर्मुझ की खाड़ी में इराणी सेना ने अमेरिका का डाइव्ह-एलडी नाम का मानवरहित अत्याधुनिक पनडुब्बी ड्रोन जब्त कर लिया। IRGC ने समुद्र से इस 3 टन के ड्रोन को बाहर निकालते हुए तस्वीरें और वीडियो सबूत के तौर पर जारी किए हैं। यह ड्रोन अमेरिकी डिफेंस कंपनी अँड्युरिल इंडस्ट्रीज ने बनाया है और यह लगातार 10 दिनों तक समुद्र में 6,000 मीटर यानी 19,700 फीट की गहराई पर रहकर समुद्री निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और समुद्र में बिछी माइंस ढूंढने का काम करता है।

इराण ने इसे एक जटिल और कामयाब खुफिया कार्रवाई बताया है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना के CENTCOM के प्रवक्ताओं ने साफ किया कि यह ड्रोन तकनीकी खराबी के चलते समुद्र में डेड यानी बेकाबू हालत में तैर रहा था। यह एक पुराना मॉडल है और इसमें कोई वर्गीकृत या संवेदनशील गोपनीय जानकारी दर्ज नहीं थी, ऐसा दावा अमेरिका ने किया है। लेकिन तकनीक के लिहाज से यह ड्रोन इराण के हाथ लगना अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

कुल मिलाकर होर्मुझ की खाड़ी बंद करने की इराण की कोशिश और उसका जवाब देने वाला अमेरिका का आक्रामक रुख, इन दोनों वजहों से मिडल ईस्ट में जंग और भड़क गई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच यह टकराव कौन सा मोड़ लेता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है।

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