गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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हौथी विद्रोहियों ने क्षेपणास्त्र बनाने के लिए क्लॉड AI का सहारा लिया, Anthropic की रिपोर्ट में खुलासा

Anthropic की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि यमन में सक्रिय हौथी विद्रोहियों के एक हथियार इंजीनियरिंग सेल ने बैलिस्टिक और गाइडेड मिसाइलों के लिए सॉफ्टवेयर बनाने में क्लॉड AI का इस्तेमाल करने की कोशिश की।

हौथी विद्रोहियों ने क्षेपणास्त्र बनाने के लिए क्लॉड AI का सहारा लिया, Anthropic की रिपोर्ट में खुलासा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

AI टेक्नोलॉजी जिस रफ्तार से दुनियाभर में फैल रही है, उसी के साथ इसके गलत इस्तेमाल की एक बेहद गंभीर खबर भी सामने आई है, जो इंटरनेशनल सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही है। अमेरिकी कंपनी Anthropic ने अपनी एक नई रिपोर्ट में बताया है कि यमन में एक्टिव हौथी विद्रोहियों के हथियार इंजीनियरिंग सेल ने घातक बैलिस्टिक मिसाइलें और गाइडेड रॉकेट बनाने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने में क्लॉड AI मॉडल का इस्तेमाल करने की कोशिश की।

Anthropic ने हाल ही में 154 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है, जिसका शीर्षक है "डिटेक्टिंग एंड काउंटरिंग मिसयूज ऑफ AI: सितंबर 2026"। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह AI की सुरक्षा को दरकिनार करके उसे हथियार बनाने के काम में लगाया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के इस हथियार सेल ने कंपनी के "क्लॉड कोड" मॉडल को एक वर्चुअल सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की। यह ग्रुप तीन बड़े मिलिट्री मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा था। इनमें एक गाइडेड रॉकेट, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाला मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल, और "R2000" नाम की एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम शामिल थी।

खास बात यह है कि "R2000" प्रोग्राम के तहत ये विद्रोही "हाइपरसॉनिक ग्लाइड व्हीकल" का एक खास वर्जन डेवलप कर रहे थे। इन हथियारों को उड़ान के दौरान सही दिशा, कंट्रोल और स्टेबिलिटी देने के लिए जरूरी "गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल" (GNC) सॉफ्टवेयर लिखने के वास्ते इन्होंने क्लॉड AI से टेक्निकल जानकारी और कोड निकलवाने की कोशिश की।

AI मॉडल्स में मिलिट्री या घातक हथियारों से जुड़ी जानकारी न देने के लिए सख्त सेफ्टी फिल्टर्स लगे होते हैं। लेकिन हौथी इंजीनियरिंग ग्रुप ने इन फिल्टर्स को चकमा देने के लिए काफी होशियारी से काम किया। इन्होंने अलग-अलग सेशन में सवाल बांट-बांट कर पूछे, एक सेशन में सिर्फ आम कोडिंग, दूसरे में टेक्निकल रिसर्च और तीसरे में मिले हुए कोड की टेस्टिंग। इस तरह पायदान-दर-पायदान चलकर उन्होंने AI की सुरक्षा व्यवस्था को धोखा देने की कोशिश की।

इस ग्रुप ने बाजार में मिलने वाले फोन-क्लास फ्लाइट कंप्यूटर को ओपन-सोर्स ऑटोपायलट सिस्टम से जोड़ने के लिए भी AI की कोडिंग मदद ली। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तैयार किए गए सॉफ्टवेयर के आधार पर एक गाइडेड रॉकेट की असली टेस्टिंग भी की गई थी, लेकिन वह टेस्ट फेल हो गया। टेस्ट फेल होने के बाद, नाकामी की टेक्निकल वजह ढूंढने और गड़बड़ी सुधारने के लिए इस ग्रुप ने फिर से AI का सहारा लिया।

Anthropic की इस 154 पन्नों की रिपोर्ट में सिर्फ यमन का ही नहीं, बल्कि रूस और चीन से जुड़े पांच और अलग-अलग हथियार प्रोजेक्ट्स का भी जिक्र है। इनमें एंटी-टॉरपीडो सिस्टम, ऑटोनॉमस ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टेक्नोलॉजी और हवाई सुरक्षा प्रणाली को बाधित करने वाले सॉफ्टवेयर डेवलप करने की कोशिशें उजागर हुई हैं।

इसके अलावा, बर्ड फ्लू और चिकनगुनिया जैसे खतरनाक वायरस से जुड़ी बायोलॉजिकल रिसर्च के लिए भी AI इस्तेमाल करने की कुछ शक-भरी कोशिशें इस जांच में सामने आई हैं। Anthropic ने यह शक भरी हरकत पहचानते ही जुड़े सारे अकाउंट फौरन सस्पेंड कर दिए और यह सारी संवेदनशील जानकारी इंटरनेशनल इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी एजेंसियों के साथ शेयर की। इस घटना ने आने वाले वक्त में AI टेक्नोलॉजी पर ग्लोबल कंट्रोल की जरूरत को और उजागर कर दिया है।

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