मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:34 IST

गरबा के लिए लड़कियों की 'बोली' का दावा, संभाजी ब्रिगेड ने महाराष्ट्र में जताया कड़ा एतराज

संभाजी ब्रिगेड का आरोप, गरबा खेलने के लिए लड़कियों को 1000 से 5000 रुपये तक में भाड़े पर बुलाया जा रहा है

गरबा के लिए लड़कियों की 'बोली' का दावा, संभाजी ब्रिगेड ने महाराष्ट्र में जताया कड़ा एतराज
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नवरात्री नजदीक आते ही महाराष्ट्र और गुजरात में गरबा-डांडिया का माहौल शुरू हो जाता है। ढोल-ताशों की आवाज, रंग-बिरंगे कपड़े और गरबे की धुन पर थिरकते नौजवान, ऐसा नजारा हर तरफ दिखता है। लेकिन इस बार गरबा कार्यक्रमों को लेकर महाराष्ट्र में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

संभाजी ब्रिगेड ने दावा किया है कि गरबा खेलने के लिए लड़कियों को भाड़े पर बुलाया जा रहा है। संगठन का आरोप है कि कुछ जगहों पर लड़कियों की 1000 से 5000 रुपये तक बोली लगाई जा रही है। इस मामले पर संभाजी ब्रिगेड ने गुस्सा जताया है।

संभाजी ब्रिगेड के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट संतोष शिंदे ने इस कथित मामले पर सख्त एतराज जताया है। उनका कहना है कि पारंपरिक गरबा और धार्मिक उत्सव को व्यावसायिक रूप देने के चक्कर में कुछ जगहों पर गलत तरीके अपनाए जा रहे हैं। संतोष शिंदे ने कहा, "महाराष्ट्र में भाड़े पर गरबे के लिए लड़कियां देने का यह गोरखधंधा संभाजी ब्रिगेड बर्दाश्त नहीं करेगी।"

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गरबा डांस के लिए लड़के-लड़कियों को 1000 से 5000 रुपये तक भाड़े पर बुलाया जाता रहा, तो ऐसे कार्यक्रमों का विरोध किया जाएगा। संभाजी ब्रिगेड ने कहा है कि तथाकथित प्रगतिशील महाराष्ट्र में पारंपरिक उत्सव के नाम पर ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

संगठन का कहना है कि गरबा और डांडिया सिर्फ मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि है। इसलिए इस उत्सव के स्वरूप को व्यावसायिक फायदे के लिए बदला नहीं जाना चाहिए, यह बात संतोष शिंदे ने कही। साथ ही संभाजी ब्रिगेड ने राज्य में फिलहाल सूखे जैसे हालात होने का मुद्दा भी उठाया। संगठन का कहना है कि किसान जब संकट में हैं, ऐसे में उत्सव मनाते वक्त सामाजिक भान रखने की जरूरत है।

नवरात्री के मौके पर गरबा और डांडिया कार्यक्रमों का आयोजन बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लड़के-लड़कियां शामिल होते हैं। इसी को देखते हुए मांग की गई है कि आयोजक कार्यक्रमों का प्लान बनाते वक्त नियमों का पालन करें और ऐसे मामलों से बचें जिनसे उत्सव पर दाग लगे। संतोष शिंदे ने साफ कहा है कि "ऐसे कार्यक्रम उधल कर रख देंगे", यानी संगठन इन आयोजनों को चलने नहीं देगा।

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