गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:01 IST

गणेशोत्सव में मुंबई के सर्राफा बाजार में सोने की जबरदस्त खरीदारी, 4000 करोड़ की उलाढाल का अनुमान

मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान बाप्पा के श्रृंगार के लिए सोने-चांदी की खरीदारी में जबरदस्त उछाल आया है, महंगाई के बावजूद ग्राहकी में कोई कमी नहीं।

गणेशोत्सव में मुंबई के सर्राफा बाजार में सोने की जबरदस्त खरीदारी, 4000 करोड़ की उलाढाल का अनुमान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

इस बार गणेशोत्सव में पारंपरिक त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन को भी पीछे छोड़ते हुए मुंबई के सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की खरीदारी का रिकॉर्ड बन रहा है। लोग सिर्फ गणपति बाप्पा के श्रृंगार के लिए भारी मात्रा में सोना-चांदी खरीद रहे हैं। श्रद्धा और इच्छापूर्ति के इस माहौल में महंगाई के आंकड़े भी बेअसर साबित हो रहे हैं, और मुंबई के सर्राफा बाजार में सोने की मांग कई गुना बढ़ गई है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल स्पोक्सपर्सन कुमार जैन के मुताबिक, इस बार गणेश चतुर्थी तक सिर्फ बाप्पा के आभूषणों की बिक्री से ही 4000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार होने का अनुमान है। खास बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले सोने के दाम में 40 फीसदी से ज्यादा की तेजी आने के बावजूद ग्राहकी में कोई नरमी नहीं दिख रही।

2026 में गणेशोत्सव के दौरान 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1,50,000 रुपये तक पहुंच गया है। इसके बावजूद मुंबई के सर्राफा बाजार में हर रोज 200 से 225 करोड़ रुपये से ज्यादा के आभूषण बिक रहे हैं। रोजमर्रा के इस्तेमाल या मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाए जाने वाले 150 से ज्यादा खास हार बिक रहे हैं। अकेले मुंबई में 200 टन से ज्यादा जबकि पूरे देश में करीब 250 टन सोने की खरीद-बिक्री होने की उम्मीद जताई जा रही है।

दो सौ साल पुराने इतिहास वाले मुंबई के झवेरी बाजार समेत दूसरे बड़े ज्वेलरी सेंटरों पर बाप्पा की सजावट के लिए दिन-रात काम चल रहा है। जिन भक्तों की मनोकामना पूरी हुई है, वे बड़े पैमाने पर गहने खरीद रहे हैं।

सबसे ज्यादा मांग में हैं सोने के हार और पत्र, जिनका वजन 10 ग्राम से लेकर 150 ग्राम तक है। इनमें पारंपरिक कंठहार, पादुका पत्र और मोहर सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। इसके अलावा 15 से 25 ग्राम के खास अर्पण भी खूब बिक रहे हैं, जिनमें सोने के मोदक, चूड़े और जासवंती का फूल-पत्ता शामिल है। चांदी के सामान में 50 ग्राम से सवा किलो तक के वजन वाले चांदी के चूहे और बड़े मुकुट की मांग है। पंडाल स्पेशल आभूषण, जैसे सूंड और कान के कड़े, बाजूबंद, गदा और त्रिशूल, ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज किए जा रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि गणेशोत्सव सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि कोंकण और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। धनतेरस या गुड़ी पाड़वा पर की जाने वाली खरीदारी को निवेश माना जाता है, जबकि गणेशोत्सव में होने वाली खरीदारी को आस्था और मन्नत पूरी होने का जरिया माना जाता है। यही वजह है कि भक्त आर्थिक हिसाब-किताब को दरकिनार करते हुए 10 ग्राम से लेकर डेढ़ सौ ग्राम तक के हार, सोने के मोदक और चांदी के प्रतीक खरीदने को तरजीह दे रहे हैं।

पिछले साल के मुकाबले इस बार बाजार में खरीदारी की रफ्तार दोगुनी हो गई है, और रिटेल गहनों के मुकाबले बाप्पा के श्रृंगार से जुड़े सामान का सेगमेंट सबसे ज्यादा ताकतवर साबित हुआ है।

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