मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:33 IST

गांधी जयंती पर वरोर में वाढवण बंदर विरोधियों ने जमावबंदी तोड़ी, सेवा रोड पर पहुंचे

वाढवण बंदर के विरोधियों ने गांधी जयंती के दिन शुक्रवार को वरोर में जमावबंदी आदेश को चुनौती देते हुए सविनय कायदेभंग आंदोलन किया।

गांधी जयंती पर वरोर में वाढवण बंदर विरोधियों ने जमावबंदी तोड़ी, सेवा रोड पर पहुंचे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गांधी जयंती के दिन शुक्रवार को वरोर में वाढवण बंदर का विरोध करने वालों ने प्रशासन के जमावबंदी आदेश को चुनौती देते हुए सविनय कायदेभंग आंदोलन किया। आंदोलनकारी ग्रीनफिल्ड हाईवे की सर्विस रोड के काम वाली जगह पर पहुंच गए। उनका आरोप है कि इस काम में नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

सर्विस रोड के लिए जो पत्थर लाए गए थे, उन्हें आंदोलनकारियों ने हाथ से एक तरफ हटा दिया और इस तरह प्रशासन के रुख का विरोध दर्ज किया। यह आंदोलन वाढवण बंदर विरोधी संघर्ष समिति और उसके साथ जुड़े संगठनों की तरफ से वरोर-चिंचणी मार्ग के किनारे हुआ। आंदोलनकारियों ने उस जगह की तरफ मोर्चा मोड़ा, जहां सर्विस रोड का काम चल रहा था। "जल-जंगल-जमीन हमारा अधिकार", "हमारे गांव में, हमारी सरकार", "एक ही जिद्द वाढवण बंदर रद्द" और "जितेंगे, लड़ेंगे" जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

आंदोलनकारियों ने सर्विस रोड के 500 मीटर के दायरे में लगे जमावबंदी आदेश का मुद्दा उठाया। इसके साथ ओवरलोड गाड़ियों की आवाजाही और सड़क के काम में नियमों के उल्लंघन की बात भी रखी। पत्थर हाथ से हटाकर उन्होंने गांधीवादी तरीके से सविनय कायदेभंग किया।

आंदोलन को समर्थन देते हुए विधायक विनोद निकोले ने प्रशासन के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोग वाढवण बंदर के खिलाफ हैं, फिर भी आंदोलन की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। निकोले ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित सविनय कायदेभंग के जरिए दमन के खिलाफ आवाज उठाने का हक जनता को है। उन्होंने यह भी कहा कि भूमिपुत्रों को विनाशकारी बंदर नहीं चाहिए।

आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने भारी बंदोबस्त लगाया था। करीब 50 पुलिस अधिकारी और 450 पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए थे। भरी धूप में मछुआरे, किसान, बागवान, डायमेकर्स, भूमिपुत्र, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में आंदोलन की जगह पर डटे रहे।

इस मौके पर वाढवण बंदर विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण पाटील, उपाध्यक्ष विनीत पाटील और मानवेंद्र आरेकर मौजूद थे। वाढवण बंदर युवा संघर्ष समिति के अध्यक्ष मिलिंद राऊत, शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) गुट के जिला प्रमुख गिरीश राऊत और कांग्रेस के पालघर जिलाध्यक्ष कैप्टन सत्यम ठाकूर भी आए। नेशनल फिश वर्क फोरम के अध्यक्ष रामकृष्ण तांडेल, ठाणे जिला मध्यवर्ती मच्छिमार सहकारी संस्था के अध्यक्ष जयवंत तांडेल और कुणबी सेना के अध्यक्ष विश्वनाथ पाटील के साथ कई आदिवासी और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल थे।

गांधी जयंती के दिन हुए इस आंदोलन से वाढवण बंदर रद्द करने की मांग एक बार फिर जोरदार तरीके से सामने आई।

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