गणपति बाप्पा की विदाई के बाद मुंबई लौटने वालों को ट्रेन-बस के लिए भारी मशक्कत
कोकण से मुंबई लौट रहे नौकरीपेशा लोगों को रेलवे में सीट न मिलने से एसटी बसों की तरफ भागना पड़ रहा है।
गणेशोत्सव खत्म होते ही रत्नागिरी और राजापुर से मुंबई लौटने वाले लोगों का सफर मुश्किल हो गया है। बाप्पा को विदा करने के बाद अब सबको वापस नौकरी और धंधे पर लौटना है, लेकिन रेलवे और एसटी बस दोनों में सीट मिलना मुश्किल हो गया है।
त्योहार के दिनों में मुंबई से कोकण जाने वालों की भीड़ तो होती ही है, लेकिन जब उत्सव खत्म होने के बाद यही सारे लोग एक साथ मुंबई लौटने लगते हैं तो हालत और बिगड़ जाती है। मुंबई की तरफ जाने वाली ज्यादातर ट्रेनों का रिजर्वेशन फुल हो चुका है। जिन्हें कन्फर्म टिकट नहीं मिला, वे किसी और साधन का सहारा ढूंढ रहे हैं।
ट्रेन में टिकट न मिलने की वजह से बहुत से लोग एसटी बस की तरफ मुड़ रहे हैं, जिससे बसों की रेगुलर सर्विस पर भी दबाव बढ़ गया है। कुछ रूटों पर बस का रिजर्वेशन मिलना भी मुश्किल हो गया है, ऐसे में लोगों को जो भी बस मिल जाए उसी से आगे का सफर करना पड़ रहा है।
गणेशोत्सव के लिए मुंबई से कोकण जाते वक्त हर साल अलग-अलग स्तर पर खास इंतजाम किए जाते हैं। कुछ राजनीतिक पार्टियां और संस्थाएं मुफ्त बस सेवा भी चलाती हैं, जिससे त्योहार के लिए गांव जाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। लेकिन उत्सव खत्म होने के बाद वापसी में पर्याप्त इंतजाम न होने की शिकायत लोग कर रहे हैं।
छुट्टी खत्म होते ही बहुत से लोगों को तय दिन पर मुंबई में काम या ड्यूटी पर पहुंचना जरूरी है। ऐसे में सफर में एक-दो दिन की देरी भी उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। परिवार के साथ सफर करने वाले, बुजुर्ग और छोटे बच्चों के साथ चल रहे परिवारों को भीड़ की वजह से ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
कन्फर्म टिकट न मिलने पर कुछ लोगों को जो बस मिले, जो गाड़ी मिले, उसी में सफर करना पड़ रहा है। स्टेशन और बस स्टैंड पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए लोगों का कहना है कि वापसी के सफर के लिए भी पहले से ज्यादा प्लानिंग की जरूरत है।
कोकण से मुंबई लौटने वालों की तादाद देखते हुए लोगों की मांग है कि प्रशासन ज्यादा एसटी बसें चलाए और रेलवे प्रशासन जरूरत के हिसाब से स्पेशल ट्रेनें और एक्स्ट्रा फेरे प्लान करे। जैसे गणेशोत्सव के लिए गांव जाने वालों के लिए इंतजाम होता है, वैसे ही अगर वापसी के सफर की भी पहले से और पूरी प्लानिंग हो जाए तो लोगों की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।
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