गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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गडचिरोली के एटापल्ली में टाटा ट्रस्ट्स की मदद से पहली सामुदायिक क्रेच शुरू

पोषण माह के दौरान गडचिरोली जिला प्रशासन, टाटा ट्रस्ट्स और मोबाइल क्रेचेस के साझा प्रयास से एटापल्ली में तीन साल तक के बच्चों के लिए क्रेच खोली गई, जो जिले में बनने वाली 45 क्रेचों में पहली है।

गडचिरोली के एटापल्ली में टाटा ट्रस्ट्स की मदद से पहली सामुदायिक क्रेच शुरू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गडचिरोली जिले के एटापल्ली ब्लॉक में गुरुवार को चाइल्डहुड न्यूट्रिशन एंड डेवलपमेंट इनिशिएटिव के तहत पहली सामुदायिक क्रेच शुरू की गई। इसे टाटा ट्रस्ट्स ने गडचिरोली जिला प्रशासन और मोबाइल क्रेचेस फॉर वर्किंग मदर्स चिल्ड्रन के साथ मिलकर शुरू किया है।

यह पूरी पहल टाटा ट्रस्ट्स, गडचिरोली जिला प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार के महिला व बाल विकास विभाग के बीच हुए एमओयू के तहत चलाई जा रही है। उद्घाटन कार्यक्रम में गडचिरोली के जिलाधिकारी अविष्यंत पांडा मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

इस पहल का मकसद तीन साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पोषण, देखभाल और शुरुआती विकास को मजबूत करना है, खासकर उन परिवारों के लिए जो जिले के दूर-दराज और सुविधाओं से वंचित इलाकों में रहते हैं।

यह कार्यक्रम पोषण माह के दौरान शुरू किया गया है और इसमें पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा बच्चे की जिंदगी के शुरुआती अहम वर्षों में उसके विकास पर ध्यान दिया जाएगा। इन सामुदायिक क्रेचों में छोटे बच्चों को सुरक्षित और उत्साहवर्धक माहौल मिलेगा।

इससे महिलाओं को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें भरोसेमंद चाइल्डकेयर मिलने से वे रोजी-रोटी के काम और अन्य जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से संभाल पाएंगी।

एटापल्ली की यह क्रेच गडचिरोली जिले में बनने वाली कुल 45 सामुदायिक क्रेचों में पहली है। बाकी क्रेचें आने वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएंगी, जिससे पोषण और बाल विकास की सुविधाएं ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंच सकें।

गडचिरोली मुख्य रूप से आदिवासी जिला है, जहां गोंड और माडिया गोंड समुदाय की आबादी करीब 39 प्रतिशत है। एटापल्ली ब्लॉक में 197 से ज्यादा गांव हैं, जिनमें से कई दूर और जंगली इलाकों में बसे हैं, जिससे यहां के परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना मुश्किल काम है।

उद्घाटन के मौके पर जिलाधिकारी अविष्यंत पांडा ने कहा कि इस पहल से एटापल्ली के बच्चों को उनकी भौगोलिक स्थिति चाहे जो भी हो, स्वास्थ्य सेवाएं, पर्याप्त और विविध पोषण तथा सुरक्षित शुरुआती देखभाल मिल सकेगी।

पांडा ने कहा, "यह पहल इस बात की दिशा में एक अहम कदम है कि एटापल्ली का हर बच्चा, चाहे वह कहीं भी रहता हो, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्याप्त व विविध पोषण, सुरक्षित व उत्साहवर्धक शुरुआती देखभाल पा सके। टाटा ट्रस्ट्स के साथ इस साझेदारी के जरिए हम अपने सबसे छोटे नागरिकों के भविष्य की नींव मजबूत करना चाहते हैं।"

टाटा ट्रस्ट्स में हेड-न्यूट्रिशन जयीता चौधरी ने कहा कि उनका संगठन लंबे समय से ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में सामुदायिक क्रेच सेवाओं के जरिए बच्चों के शुरुआती विकास को सहयोग देता आया है।

चौधरी ने बच्चे की जिंदगी के पहले 1,000 दिनों के महत्व पर जोर दिया, जो उसके विकास, संज्ञानात्मक क्षमता और समग्र सेहत के लिए बेहद अहम होते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान कुपोषण को रोकना बहुत जरूरी है क्योंकि विकास में आई कमी का असर लंबे समय तक रह सकता है।

चौधरी के मुताबिक, यह पहल परिवारों तक सुरक्षित चाइल्डकेयर और जरूरी पोषण पहुंचाएगी, बच्चों को आंगनवाड़ी जैसी सरकारी सुविधाओं से जोड़ेगी और जिन बच्चों को मेडिकल मदद की जरूरत होगी, उन्हें समय पर आगे रेफर करने में मदद करेगी। इससे माताओं को भी रोजी-रोटी और दूसरी जिम्मेदारियां निभाने में ज्यादा आजादी मिलेगी।

गडचिरोली जिला प्रशासन और मोबाइल क्रेचेस के साथ इस साझेदारी के जरिए टाटा ट्रस्ट्स एक टिकाऊ और समुदाय आधारित मॉडल बनाना चाहता है, जो बच्चों और महिलाओं के लिए बेहतर नतीजे दे सके और आगे चलकर बड़े स्तर पर लागू करने के लिए एक उदाहरण बन सके।

मोबाइल क्रेचेस फॉर वर्किंग मदर्स चिल्ड्रन की सीईओ सुमित्रा मिश्रा ने कहा कि उनका संगठन पांच दशक से ज्यादा समय से इस कोशिश में लगा है कि अच्छी देखभाल और पोषण न मिलने की वजह से कोई बच्चा पीछे न छूट जाए।

मिश्रा ने कहा, "एटापल्ली की यह क्रेच हमारी इस प्रतिबद्धता को दिखाती है कि हम टाटा ट्रस्ट्स और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर देश के सबसे दूर-दराज कोनों तक भी उसी क्वालिटी की शुरुआती देखभाल और पोषण पहुंचाना चाहते हैं।"

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