मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:23 IST

गड़चांदूर में रिपाइं स्थापना दिवस पर बाबासाहेब को नमन, अस्पताल में मरीजों को फल बांटे

रिपाइं के स्थापना दिवस पर गड़चांदूर में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले पर माल्यार्पण हुआ और ग्रामीण अस्पताल में मरीजों को फल बांटे गए।

गड़चांदूर में रिपाइं स्थापना दिवस पर बाबासाहेब को नमन, अस्पताल में मरीजों को फल बांटे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (रिपाइं) के स्थापना दिवस पर गड़चांदूर में दो कार्यक्रम हुए। पहले भारतीय संविधान के शिल्पकार और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के संस्थापक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले को नमन किया गया। इसके बाद ग्रामीण अस्पताल गड़चांदूर में मरीजों को फल बांटे गए।

कार्यक्रम की शुरुआत गड़चांदूर में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले पर फूलों की माला चढ़ाकर हुई।

इसके बाद ग्रामीण अस्पताल गड़चांदूर में मा. जी. एस. कांबळे गुरूजी ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर की पूजा की। कांबळे गुरूजी ने स्थापना दिवस और कार्यक्रम का मकसद भी समझाया। फिर वहां मौजूद साथी कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के मरीजों को फल बांटे।

स्थापना की बात भी कार्यक्रम में रखी गई। बताया गया कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के संस्थापक महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भारत में धम्मक्रांति के साथ-साथ जाति और धर्म से परे, संविधान के मुताबिक लोकतांत्रिक गणराज्य (रिपब्लिक) बनाने के लिए पार्टी की नींव रखी। बौद्ध धम्मदीक्षा से पंद्रह दिन पहले, 30 सितंबर 1956 को दिल्ली में 26 अलीपुर रोड पर बाबासाहेब के निवास पर शेड्यूल कास्ट फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता बाबासाहेब ने की। उसी बैठक में शेकाफे को भंग किया गया और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना की गई।

कार्यक्रम में कहा गया कि बाबासाहेब के वैचारिक अनुयायी कार्यकर्ताओं को रिपब्लिकन पार्टी का वर्धापन दिवस बड़े पैमाने पर मनाना चाहिए और बाबासाहेब की रिपब्लिकन पार्टी का प्रचार और प्रसार करना चाहिए।

कार्यक्रम में रिपाइं के महाराष्ट्र चिटणीस अशोककुमार उमरे, चंद्रपुर युवा जिलाध्यक्ष सुरज उपरे, प्रा. रमेश पाटील सर, जी. एस. कांबळे गुरूजी, कोरपना तालुका संघटक चंपतभाऊ राजूरकर और तालुका कार्याध्यक्ष हंसराज ताकसांडे शामिल थे। वरिष्ठ कार्यकर्ता रामदास रामटेके, दिनेश गायकवाड, उमेश गौतम, भीमराव भगत और सुनील वालदे भी मौजूद रहे।

उपाध्यक्ष वारलूजी नळे, पुरुषोत्तम उपरे, देवराव भगत, अनैशा उपरे, शिवाजी धुपे, बंडू पिपरे, आकाश ताकसांडे, अनंत रामटेके, रामचंद्र सोनटक्के, राजकुमार दुर्गे और अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम में अहम योगदान दिया।

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