एसटी की लालपरी होगी 2037 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक, 2027 से पुरानी बसों का रूपांतर शुरू
एसटी महामंडल की 312वीं संचालक मंडल बैठक में डीजल पर निर्भरता खत्म करने का फैसला हुआ। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 2037 तक पूरा बेड़ा इलेक्ट्रिक करने की जानकारी दी।
महाराष्ट्र की लोकवाहिनी कही जाने वाली एसटी की 'लालपरी' अब नए रूप में सामने आने की तैयारी में है। एसटी महामंडल की हाल ही में हुई 312वीं संचालक मंडल की बैठक में घोषणा की गई कि 2027 से पुरानी बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदलने का काम शुरू होगा। इसका मकसद डीजल पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करना है।
अभी एसटी के 14 हजार बसों के बेड़े में 1100 ई-बसें हैं। परिवहन मंत्री और एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने बताया कि डीजल बसों की उम्र करीब 15 साल मानी जाती है। इसे देखते हुए 5 हजार पुरानी बसें चरणबद्ध तरीके से स्क्रैप की जाएंगी, जबकि कुछ बसों को इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा। उसके बाद धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।
सात से आठ साल चल चुकी पुरानी बसों को 2027 से चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक में बदलने की मुहिम शुरू होगी। साथ ही यात्रियों की जरूरत के हिसाब से नई ई-बसें बड़ी तादाद में खरीदी जाएंगी।
डीजल बसों की उम्र लगभग 15 साल है, जबकि ई-बसें करीब 20 साल चलती हैं। यानी इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल ज्यादा समय तक हो सकेगा। डीजल पर निर्भरता घटने से ईंधन के खर्च में भी बचत होने की उम्मीद है।
ई-बसों की बढ़ती संख्या के लिए चार्जिंग स्टेशन, बिजली का ढांचा और तकनीकी सिस्टम खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। डिपो के हिसाब से प्लानिंग करके ई-बसों की खरीद और चार्जिंग सुविधा का काम साथ-साथ चलाया जाएगा। चार्जिंग ढांचे की तैयारी डिपो-दर-डिपो तेजी से चल रही है और 2037 तक यह लाडकी 'लालपरी' पूरी तरह प्रदूषण मुक्त 'ई-लालपरी' बनकर सड़क पर दिखेगी।
सरनाईक ने कहा, "एसटी महाराष्ट्र के हर गांव को जोड़ने वाली सार्वजनिक सेवा है। इसका आधुनिकीकरण करते हुए पर्यावरण की जिम्मेदारी भी अहम है। डीजल पर निर्भरता घटाकर साफ, हरित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था खड़ी करने का हमारा संकल्प है। 2037 तक एसटी का 100 प्रतिशत बेड़ा इलेक्ट्रिक करने के लिए योजना के हिसाब से काम चल रहा है।"
उन्होंने भरोसा जताया कि "महाराष्ट्र के कोने-कोने में दौड़ने वाली लालपरी भविष्य में हरित महाराष्ट्र की 'ई-लालपरी' बनेगी। पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का देश का आदर्श मॉडल महाराष्ट्र में खड़ा करने की दिशा में एसटी की यात्रा चल रही है।"