बुधवार, 16 सितमबर 2026

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22:41 IST

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री बीजिंग पहुंचे, चीन ने दोनों देशों को संयम बरतने को कहा

चीन के विदेश मंत्री वांग यी और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बीजिंग में अहम बैठक हुई।

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री बीजिंग पहुंचे, चीन ने दोनों देशों को संयम बरतने को कहा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात दिन-ब-दिन और बिगड़ते जा रहे हैं, और दुनिया भर में तनाव की स्थिति और गहरी होती जा रही है। इसी बढ़ते टकराव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह तीखा टकराव जल्द से जल्द खत्म हो, इसके लिए चीन अब बीच-बचाव करने वाले की भूमिका निभाता दिख रहा है।

बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच एक बेहद अहम द्विपक्षीय बातचीत हुई। इस मीटिंग में चीन ने दोनों देशों से आक्रामक रवैया छोड़कर शांति का रास्ता अपनाने की अपील की।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने वॉशिंगटन और तेहरान, दोनों को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "अमेरिका और ईरान के बीच लगातार चल रहा टकराव किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। दोनों देशों को मौजूदा बेहद संवेदनशील हालात में समझदारी और संयम से काम लेना जरूरी है।" इलाके में तनाव और न बढ़े, इसके लिए लाल सागर और यमन जैसे क्षेत्रों को भी इस टकराव की आंच से दूर रखा जाना चाहिए, इस बात पर चीन ने खास जोर दिया।

वांग यी ने अमेरिका और ईरान से लंबित मुद्दों पर सार्थक और सकारात्मक बातचीत शुरू करने की अपील की। इससे पहले इस्लामाबाद में हुए समझौते (एमओयू) का जिक्र करते हुए चीन ने कहा कि दोनों देशों को उस करार के तहत तय की गई बातचीत की चौखट पर लौटना जरूरी है। मिडिल ईस्ट में पहले हुआ शांति समझौता टूटने की वजह से ही यह नई अस्थिरता पैदा हुई है। इसलिए पुराने करार की गंभीरता को समझते हुए दोबारा शांति कायम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ऐसा चीन का कहना है।

अमेरिका के साथ जंग शुरू होने के बाद से ईरान के विदेश मंत्री का यह दूसरा चीन दौरा है। इससे पहले मई महीने में उन्होंने चीन का दौरा किया था, जो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले हुआ था। संयोग से अराघची का यह मौजूदा दौरा भी शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच वॉशिंगटन में होने वाली शिखर बैठक से बस कुछ दिन पहले हो रहा है। इसी वजह से इस टकराव में चीन कौन सा रुख अपनाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है।

पिछले ही हफ्ते नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स शिखर बैठक के दौरान भी अराघची और वांग यी की मुलाकात हुई थी। उस बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ के ब्रिक्स देशों से मिडिल ईस्ट की जंग में शांतिरक्षक की भूमिका निभाने की अपील की थी। चीन इस शांति मुहिम में सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है, यह बात जिनपिंग ने साफ कही थी। इसीलिए ब्रिक्स के मंच के तुरंत बाद अराघची का बीजिंग दौरा होना कूटनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

चीन खुद को इस जंग में एक निष्पक्ष और तटस्थ मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों को देखें तो चीन ईरान का दुनिया में सबसे बड़ा आर्थिक साझीदार है। ईरान से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा चीन ही खरीदता है। इसलिए ईरान की आर्थिक हालत स्थिर बनी रहे, यह चीन की अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

ईरान के विदेश मंत्री अराघची अपनी यह यात्रा पूरी करके बीजिंग से रवाना होंगे, लेकिन इस दौरे से वॉशिंगटन पर कूटनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव शांति समझौते की ओर बढ़ेगा या आने वाले वक्त में और उग्र रूप लेगा, यह आने वाले दिनों के घटनाक्रम से ही साफ होगा।

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