DTU का नया चैलेंज : गांवों की समस्याओं का हल ढूंढो, दो करोड़ का इनाम जीतो
दिल्ली टेक्नॉलॉजिकल यूनिवर्सिटी में शुरू हुए सेवा फर्स्ट नेशनल यूथ इनोवेशन चैलेंज में देशभर के छात्र-छात्राएं, स्टार्टअप और रिसर्च संस्थान हिस्सा ले सकेंगे।
दिल्ली टेक्नॉलॉजिकल यूनिवर्सिटी यानी डीटीयू में युवाओं के लिए एक नया मौका सामने आया है। यूनिवर्सिटी ने सेवा फर्स्ट नेशनल यूथ इनोवेशन चैलेंज नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका मकसद युवाओं को रोजमर्रा की समस्याओं के नए और काम के हल ढूंढने का मौका देना है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशिष सूद ने 19 सितंबर को डीटीयू में इस चैलेंज का शुभारंभ किया। यह चैलेंज 100 दिन तक चलेगा और इसमें कुल दो करोड़ रुपये का इनाम रखा गया है।
इस चैलेंज में शामिल होने वाले युवाओं को सिर्फ आइडिया देकर नहीं रुकना पड़ेगा। उन्हें समस्या पहचानने से लेकर उसका हल निकालने, प्रोटोटाइप बनाने, उसकी टेस्टिंग करने और असल हालात में उसे आजमाकर देखने तक पूरा काम करना होगा। यानी चैलेंज का मकसद है कि आगे चलकर काम आने वाले असली हल तैयार हों।
सेवा फर्स्ट के तहत राष्ट्रीय स्तर की और लोकल कम्युनिटी से जुड़ी समस्याओं पर काम करने के लिए अलग-अलग सेक्टर तय किए गए हैं। इनमें खेती और गांवों का विकास, पढ़ाई-लिखाई, हेल्थ, कचरा मैनेजमेंट, एनर्जी, पर्यावरण, शहर की दिक्कतें और ट्रांसपोर्ट जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा एआई, रोबोटिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, स्मार्ट मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजास्टर मैनेजमेंट और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े इनोवेशन पर भी काम किया जा सकता है। लोकल लेवल के चैलेंज में हिस्सा लेने वाले अपने आसपास की असल समस्या पहचानकर उस पर हल ढूंढ सकते हैं।
इस चैलेंज में स्कूल और आईटीआई लेवल से लेकर डिप्लोमा, यूजी, पीजी और पीएचडी के स्टूडेंट्स भाग ले सकते हैं। इसके अलावा स्टार्टअप्स, एमएसएमई, रिसर्च संस्थान और सरकारी लैब्स भी तय कैटेगरी के हिसाब से शामिल हो सकते हैं। जो भी इसमें भाग लेना चाहे वो अकेले या टीम बनाकर एंट्री दे सकता है। डीटीयू इस पूरे कार्यक्रम के लिए नॉर्थ जोन का काम देख रहा है, जिसमें दिल्ली के साथ हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और लद्दाख शामिल हैं।
चैलेंज के पहले चरण में समस्या और आइडिया की पहचान की जाएगी। शुरुआती जांच के बाद चुनी गई टीमों को मेंटॉरशिप और एक्सपर्ट्स की सलाह दी जाएगी। इसके बाद हिस्सा लेने वाले अपने हल का प्रोटोटाइप बनाएंगे, जिसकी तकनीकी जांच होगी। फिर उन हलों को असल या मिलती-जुलती स्थिति में टेस्ट किया जाएगा। आखिरी चरण में प्रोटोटाइप का प्रेजेंटेशन और मूल्यांकन होगा। डीटीयू के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में आइडिया से लेकर उसे परखने और उसका असर साबित करने तक का पूरा सफर पूरा कराने पर जोर दिया गया है।
कार्यक्रम के दौरान डीटीयू ने रूरल टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिटी एंगेजमेंट प्रोग्राम की भी घोषणा की। इसके तहत 2027-28 के शैक्षणिक सत्र से इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स को गांवों में भेजने की योजना है। वहां जाकर स्टूडेंट्स लोकल समस्याएं पहचानेंगे और टेक्नोलॉजी की मदद से उनका हल निकालने पर काम करेंगे। इस प्रोग्राम में इंजीनियरिंग, आंत्रप्रेन्योरशिप और गांवों के सामाजिक विकास को साथ जोड़ने पर जोर है। मकसद यह है कि गांवों की जरूरतों को समझकर उनके लिए काम के तकनीकी हल तैयार किए जाएं। सेवा फर्स्ट चैलेंज में चुने गए और अच्छा प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को इनाम के साथ-साथ एक्सपर्ट्स, इंडस्ट्री और स्टार्टअप सेक्टर के लोगों से गाइडेंस भी मिलेगी।