सूखे और कम बारिश से चोपड़ा में मक्का की पैदावार घटी, किसान आर्थिक संकट में
जलगांव के चोपड़ा तालुका में कम बारिश से मक्का की फसल बिगड़ी है और किसानों का खेती पर लगाया खर्च बेकार जाता दिख रहा है।
राज्य में इस वक्त सूखे के हालात हैं। सरकार ने 36 जिलों में से 32 जिलों में, यानी 358 में से 255 तालुकों में सूखा घोषित किया है। स्रोत के मुताबिक 358 तालुकों में से 265 तालुकों में करीब 74 से 75 प्रतिशत सूखा घोषित किया गया है। इस वजह से किसानों को सूखे का सामना करना पड़ रहा है।
जलगांव के चोपड़ा तालुका में मक्का उगाने वाले किसानों पर भी इसकी मार पड़ी है। यहां बारिश कम हुई, इसलिए खेतों में खड़ी फसलों की हालत खराब है। फसल की बढ़त ठीक से नहीं हो पाई, और इसका असर पैदावार पर साफ दिख रहा है।
सूखे के चलते इस साल मक्का की पैदावार कम हुई है। इसका असर बाजार पर भी पड़ा है। मक्का उगाने वाले किसानों को सही भाव नहीं मिल रहा, इसलिए खेती पर लगाया गया खर्च बेकार चला गया है। हालत यह है कि कटाई के लिए मजदूरों को देने तक के पैसे किसानों के पास नहीं हैं।
मक्के के भुट्टे तोड़ने और उन्हें इकट्ठा करने के लिए मजदूरों की मदद लगती है, और इसमें किसानों का बड़ा खर्च होता है। अब मशीन से मक्का की कटाई चल रही है, जिसमें अलग से खर्च आ रहा है। फिर ट्रैक्टर से मक्का बाजार तक ले जाने का खर्च भी करना पड़ेगा। यह बात मक्का उगाने वाले किसानों ने कही है।
किसानों के सामने एक बड़ा सवाल यह भी है कि बाजार में उन्हें मक्का का क्या भाव मिलेगा। इस साल सूखे के साथ बारिश की कमी से मक्का की पैदावार में बड़ी गिरावट आई है। इससे किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
स्रोत के मुताबिक राज्य सरकार को सूखे में किसानों को आर्थिक राहत और उपाय देने की जरूरत है। इनमें फसल कर्ज का पुनर्गठन, कृषि पंपों के बिजली बिल में छूट और किसानों के बच्चों की परीक्षा फीस माफ करना शामिल है। पानी और चारे का इंतजाम करना भी जरूरी बताया गया है।
शासन ने किसानों के लिए कुछ योजनाएं बनाई हैं, उन्हें किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। मिसाल के तौर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार हमी योजना (मनरेगा) के तहत ज्यादा से ज्यादा योजनाएं किसानों के लिए शुरू करना जरूरी बताया गया है।