गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:04 IST

ड्रोन हमले के बाद सऊदी की 1200 किमी तेल पाइपलाइन बंद, दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा

होर्मूझ जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुआ हमला, मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ा।

ड्रोन हमले के बाद सऊदी की 1200 किमी तेल पाइपलाइन बंद, दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सऊदी अरब ने अपनी अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को फिलहाल के लिए बंद कर दिया है। यह फैसला पाइपलाइन पर ड्रोन से हमला होने के बाद सुरक्षा को देखते हुए लिया गया। करीब 1200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी के पूर्वी हिस्से के तेल क्षेत्रों को लाल सागर पर मौजूद यांबू बंदरगाह से जोड़ती है, और खाड़ी क्षेत्र से तेल भेजने के लिए इसे बेहद जरूरी लाइन माना जाता है।

सऊदी के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक रियाध और मदीना के इलाकों में इस पाइपलाइन पर कई ड्रोन हमले हुए। इन हमलों में कुछ लोग जख्मी हुए, जिन्हें मेडिकल इलाज दिया गया। हमले के बाद इमरजेंसी और टेक्निकल टीमें मौके पर पहुंचीं और पाइपलाइन की सुरक्षा की जांच की। सऊदी ने एहतियात के तौर पर पाइपलाइन से तेल की सप्लाई फिलहाल रोक दी है। यह दोबारा कब शुरू होगी, इसका कोई पक्का टाइम-टेबल अभी सामने नहीं आया है।

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की अहमियत सिर्फ सऊदी तक सीमित नहीं है। यह पाइपलाइन होर्मूझ जलडमरूमध्य का एक विकल्प भी है, यानी अगर होर्मूझ से तेल की आवाजाही में दिक्कत आए तो यह रास्ता काम आता है। होर्मूझ से तेल की आवाजाही पहले से ही तनाव की वजह से प्रभावित है, ऐसे में इस पाइपलाइन पर हुआ हमला दुनिया भर की ऊर्जा मार्केट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में इस पाइपलाइन से रोजाना करीब 4 से 5 मिलियन बैरल तेल भेजा जा रहा था। अगर यह पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो सऊदी की तेल एक्सपोर्ट के साथ-साथ दुनिया भर की तेल सप्लाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

इस हमले से साफ है कि मिडिल ईस्ट के संघर्ष का सीधा असर अब ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी पर पड़ रहा है। सऊदी का कहना है कि ड्रोन इराक की दिशा से आए थे। इस घटना के बाद इराक ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब इलाके में बढ़ता तनाव भी तेल की आवाजाही के लिए चिंता की बात बन गया है। अगर होर्मूझ और लाल सागर, इन दोनों ही अहम रास्तों पर दबाव बढ़ता रहा, तो दुनिया भर में तेल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।

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