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21:53 IST

दिशा सालियन केस में सीबीआई ने दर्ज किया एफआईआर, गोल्ड मेडलिस्ट अफसर सीमा पाहुजा करेंगी जांच

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने दिशा सालियन मौत मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज की है, जांच की कमान अनुभवी अफसर सीमा पाहुजा को सौंपी गई है।

दिशा सालियन केस में सीबीआई ने दर्ज किया एफआईआर, गोल्ड मेडलिस्ट अफसर सीमा पाहुजा करेंगी जांच
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बॉलिवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियन की संदिग्ध मौत के मामले में छह साल बाद बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने इस केस में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है। इस बेहद संवेदनशील मामले की पूरी जांच अब सीबीआई की अनुभवी महिला अफसर सीमा पाहुजा के हाथ में होगी।

सीमा पाहुजा फिलहाल दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय की स्पेशल क्राइम यूनिट में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात हैं। क्राइम इन्वेस्टिगेशन में उनका अनुभव लंबा और सफल रहा है। इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के चर्चित हाथरस केस, उन्नाव रेप केस, शिमला की 'गुड़िया' मर्डर मिस्ट्री और 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस जैसी हाई-प्रोफाइल और पेचीदा केसों को सफलतापूर्वक हैंडल कर चुकी हैं। उनके इस शानदार और गहरे तफ्तीशी काम को देखते हुए 2021 में उन्हें 'बेस्ट इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर' के गोल्ड मेडल से नवाजा गया था। क्राइम की कड़ियां जोड़ने और मॉडर्न फॉरेंसिक सबूतों का सही इस्तेमाल करने में उनकी खास महारत मानी जाती है।

दिशा सालियन केस में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर दी है। सीबीआई की टीम दिशा की मौत से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध सबूतों की दोबारा जांच करेगी। जांच के शुरुआती दौर में 8 जून 2020 की रात, यानी दिशा की मौत से पहले, उसके होने वाले पति रोहन रॉय के घर हुई पार्टी में मौजूद रहे लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा उस वक्त की पुलिस जांच, घटनास्थल के रिकॉर्ड, फॉरेंसिक सामग्री और बाकी उपलब्ध दस्तावेजों की भी पड़ताल होगी।

दिशा सालियन की मौत को छह साल से ज्यादा वक्त बीत चुका है, इसलिए जांच एजेंसी के सामने पुराने सबूतों, रिकॉर्ड और गवाहों की जानकारी को फिर से खंगालने की चुनौती होगी। सीबीआई ने जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाने का काम पहले ही शुरू कर दिया है। सीबीआई की एफआईआर में कई नाम और आरोप दर्ज हैं, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक एफआईआर में नाम आने भर से किसी को अपने आप आरोपी नहीं माना जाता। जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही किसी की भूमिका तय होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सीमा पाहुजा की अगुवाई में सीबीआई की जांच इस छह साल पुराने मामले में किन तथ्यों और सबूतों तक पहुंचती है।

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