रविवार, 1 नवंबर 2026

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डीजे बैन के बीच महाराष्ट्र में ढोल-ताशा पथकों की बंपर बुकिंग, गणेशोत्सव में छाए

डीजे बैन के बीच महाराष्ट्र में ढोल-ताशा पथकों की बंपर बुकिंग, गणेशोत्सव में छाए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

डीजे पर पाबंदी के विरोध के बीच महाराष्ट्र में ढोल-ताशा पथकों की मांग बढ़ी, गणेश मंडलों ने पारंपरिक वाद्य समूहों को दी तरजीह।

महाराष्ट्र में डीजे पर लगी पाबंदी को लेकर एक तरफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, तो दूसरी तरफ ढोल-ताशा पथकों के लिए यह त्योहार का सीजन पिछले कई सालों में सबसे व्यस्त बन गया है। गणेश मंडल जैसे-जैसे डीजे के विकल्प तलाश रहे हैं, पारंपरिक वाद्य समूहों की डिमांड में जबरदस्त उछाल आ गया है।

गणेशोत्सव के पूरे 10 दिनों के लिए कई पथकों का कैलेंडर पहले ही फुल हो चुका है। 2011 से शहर में सक्रिय शिवप्रताप ढोल-ताशा पथक के संस्थापक किशोर डिकोंडावार बताते हैं कि उनका शेड्यूल पूरे 10 दिन के लिए बुक हो चुका है। उनके मुताबिक इस बार गणेशोत्सव में उनके 16 शो तय हैं और वो हर दिन प्रस्तुति देंगे। पिछले साल उन्हें सिर्फ 8 से 10 शो ही मिल पाए थे, लेकिन इस बार डीजे का ऑप्शन न होने से मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

वर्धा जिले के दैवत ढोल-ताशा पथक के राहुल उके का कहना है कि ढोल-ताशा को सिर्फ डीजे के विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह महाराष्ट्र की सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है, जो गणेश विसर्जन और आगमन के जुलूसों में एक अनुशासित और भव्य माहौल तैयार करती है। उनका कहना है कि युवा तेजी से ढोल-ताशा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि यह बिना किसी शोर-शराबे या हुड़दंग के लोगों को एकजुट करता है। इस बार आगमन और विसर्जन, दोनों के लिए अलग-अलग बुकिंग मिल रही हैं।

नागपुर जिले के संदीप जोशी डीजे बैन के समर्थन में लगातार कई पहल कर रहे हैं। वे मूक मोर्चा निकालने से लेकर अलग-अलग अधिकारियों से मिलकर बैन को असरदार बनाने में जुटे हैं। जोशी का कहना है कि डीजे के आने से बहुत पहले से गणेशोत्सव इसी जोश और भक्ति के साथ मनाया जाता रहा है, और ढोल-ताशा हमेशा से इस उत्सव का जरूरी हिस्सा रहे हैं।

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