देवी की मूर्तियां भी हवा में लटकती दिखाने पर आरती सोलंकी नाराज
मराठी अभिनेत्री आरती सोलंकी ने बैलेंसिंग देवी की मूर्तियों पर सोशल मीडिया पोस्ट में अपना गुस्सा जाहिर किया है।
गणेशोत्सव हाल ही में बड़े जोश के साथ खत्म हुआ। इस बार बप्पा का कौन सा रूप दिखेगा, इसकी सबको उत्सुकता थी। लेकिन पिछले दो साल से बैलेंसिंग गणपति बप्पा का एक नया ट्रेंड चल पड़ा है।
पिछले साल से ये बैलेंसिंग गणपति आने लगे। मूर्ति एक पैर पर तिरछी खड़ी होती है और ऐसा लगता है जैसे हवा में तैर रही हो। देखने में भारी लगती है, पर कई पुराने लोगों और भक्तों को यह पसंद नहीं आई। पहले बप्पा सिंहासन या चौरंग पर बैठे होते थे और उसमें एक रुबाब होता था। अब एक पैर पर खड़े बप्पा को देखकर कई लोगों की भावनाएं आहत हुईं।
सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी ट्रोलिंग भी हुई। कई लोगों ने कहा कि त्योहार की परिभाषा कहीं न कहीं बदल रही है। अब गणपति विदा हो गए और नवरात्र आ गई है। देवी के आगमन की धूमधाम शुरू हो चुकी है। हर तरफ मंडल देवी को लेकर जाते दिख रहे हैं। गरबा, दांडिया और नौ दिन नौ रंग की तैयारी शुरू हो गई है। पर यहां भी वही सिलसिला शुरू हो गया है।
गणपति के बाद अब देवी की भी बैलेंसिंग मूर्तियां बाजार में आ गई हैं। दिखाया जा रहा है कि देवी हवा में लटकी हैं और एक हाथ पर उनका संतुलन टिका है। यह देखकर कई लोगों को गुस्सा आया है।
इस पूरे मामले पर मराठी अभिनेत्री आरती सोलंकी ने सीधे नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर अपना गुस्सा निकाला। पोस्ट में उन्होंने लिखा, "हिंदू के तौर पर तीव्र निषेध, बैलेंसिंग के नाम पर गणपति बप्पा को लटका दिया, अब देवियों को मत लटकाइए। इतनी ही कला दिखानी है तो उसी एंगल पर अपने घरवालों को लटकाइए, हम आपकी तारीफ करने जरूर आएंगे। अपने हिंदू त्योहारों की परंपरा, मर्यादा, अनुशासन और लाज को संभालिए, उसका मजाक मत बनने दीजिए।"
आरती की इस पोस्ट को कई लोगों ने समर्थन दिया है। कई भक्त कह रहे हैं कि आरती ने जो कहा वह बिल्कुल सही है। देवताओं की मूर्तियां कोई खेल नहीं हैं, उनमें एक पवित्रता होती है।
मूर्तिकार अपनी कला दिखाने के लिए ऐसे प्रयोग करते हैं। उन्हें लगता है कि लोगों को कुछ नया दिखाना चाहिए। पर कला दिखाने की धुन में क्या हम परंपरा को भूल रहे हैं, यह बड़ा सवाल है। गणपति बप्पा हों या देवी, उनकी मूर्ति में एक सात्विकता होती है। मूर्ति देखते ही हाथ अपने आप जुड़ जाते हैं। पर जब मूर्ति एक पैर पर तिरछी लटकती है तो वह थोड़ी अजीब लगती है।
छोटे बच्चों को यह मजेदार लगेगा, पर बड़ों को यह ठीक नहीं लगता। नवरात्रि के नौ दिन बहुत पवित्र होते हैं और देवी की पूजा मन से की जाती है। ऐसे में देवी की ऐसी लटकती मूर्ति लाकर क्या उनका मान रखा जाता है, यह सवाल आरती सोलंकी ने उठाया है।
सोशल मीडिया पर भी दो गुट बन गए हैं। कुछ लोग कहते हैं कि यह बदलाव मान लेना चाहिए, इसमें बुरा क्या है। लेकिन ज्यादातर लोग कह रहे हैं कि त्योहारों की पवित्रता बनाए रखनी चाहिए और बस नया ट्रेंड बताकर देवताओं को लटकाना ठीक नहीं। आरती सोलंकी के इस दो टूक रुख से विवाद और भड़क गया है। इस बार नवरात्रि में कितने मंडल ऐसी बैलेंसिंग देवी बिठाते हैं और लोग इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, यह देखना अहम होगा।