मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
17:47 IST

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: 1300 किमी दूर से लाया गया 1405 टन का स्टील ब्रिज, ठाणे में लगाया गया

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए महाराष्ट्र का पहला स्टील ब्रिज ठाणे जिले में एनएच-3 के ऊपर लगाया गया।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: 1300 किमी दूर से लाया गया 1405 टन का स्टील ब्रिज, ठाणे में लगाया गया
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के हिस्से का एक बहुत मुश्किल और बड़ा काम पूरा हो गया है। इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए राज्य का पहला स्टील ब्रिज सफलतापूर्वक खड़ा कर दिया गया है। यह ब्रिज ठाणे जिले के भिवंडी में दिवे-अंजुर गांव में नासिक हाईवे यानी एनएच-3 के ऊपर बनाया गया है। 100 मीटर लंबे इस विशाल स्टील ब्रिज का कुल वजन 1,405 मेट्रिक टन है।

इस ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे मौके से करीब 1,300 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के त्रिची में एक वर्कशॉप में तैयार किया गया था। वहां से खास ट्रेलरों के जरिए इसे चरण दर चरण महाराष्ट्र लाया गया। यहां आकर सारे हिस्सों को जोड़कर पूरा ढांचा तैयार किया गया, और उसके बाद इसे असली जगह पर लगाया गया। यह काम भारत में इतने बड़े और पेचीदा स्टील स्ट्रक्चर बनाने, उनकी ढुलाई करने और मौके पर खड़ा करने की तकनीकी काबिलियत की एक अच्छी मिसाल है।

ब्रिज बनाते समय कटिंग, ड्रिलिंग, वेल्डिंग और पेंटिंग का काम तय डिजाइन, ड्रॉइंग और तकनीकी मानकों के हिसाब से बहुत बारीकी से किया गया। इस्तेमाल हुए स्टील के हर बैच की अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग यानी यूटी की गई थी। इस काम में लगे सभी वेल्डर और सुपरवाइजर अंतरराष्ट्रीय वेल्डिंग एक्सपर्ट्स से प्रमाणित थे। यह प्रोजेक्ट भारत की खुद की तकनीकी और निर्माण क्षमता को दिखाता है और मेक इन इंडिया की दिशा में एक अहम मिसाल बना है।

मौके पर 100 मीटर लंबे इस ब्रिज को जमीन से करीब 17.5 मीटर ऊंचाई पर अस्थायी ट्रेस्टल पर जोड़ा गया। इस काम के लिए 22 स्किड अरेंजमेंट और कुल 54,076 टॉर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ बोल्ट (टीटीएचएसबी) लगाए गए। ब्रिज की मजबूती और लंबे समय तक टिकने के लिए सी5 प्रोटेक्टिव पेंटिंग सिस्टम इस्तेमाल किया गया, वहीं कंपन को कंट्रोल करने के लिए इलास्टोमेरिक बेयरिंग लगाए गए हैं।

ब्रिज को उसकी अंतिम जगह तक पहुंचाने के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम का इस्तेमाल हुआ। इसके लिए 150-150 मेट्रिक टन क्षमता वाले दो हॉलो जैक और प्री-टेंशन मैकैलॉय बार लगाए गए। नेशनल हाईवे एनएच-3 से गुजरने वाले आम लोगों और गाड़ियों को कम से कम दिक्कत हो, इसके लिए हाईवे पर रात के वक्त ट्रैफिक ब्लॉक लेकर यह मुश्किल काम पूरा किया गया।

आमतौर पर हाईवे, एक्सप्रेसवे, बड़ी नदियों और रेलवे लाइनों के ऊपर जहां लंबे स्पैन की जरूरत होती है, वहां स्टील ब्रिज ही इस्तेमाल किए जाते हैं। इस ब्रिज की लंबाई 100 मीटर, ऊंचाई 14 मीटर और चौड़ाई 14 मीटर है, जबकि मुख्य ब्रिज का वजन 1,405 मेट्रिक टन है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल 28 स्टील ब्रिज बनाए जाने हैं। इनमें से अब तक 16 ब्रिज का काम पूरा हो चुका है, और महाराष्ट्र में लगाया गया यह पहला स्टील ब्रिज है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे