मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:33 IST

बुलढाणा में शिवसेना का मोर्चा, अरविंद सावंत ने पूछा उद्योगपतियों का कर्ज माफ तो किसानों का पुनर्गठन क्यों

बुलढाणा में मंगलवार को शिवसेना ने सूखे की मदद को लेकर बड़ा मोर्चा निकाला और किसानों को हेक्टेयर पर 1 लाख रुपये देने की मांग रखी।

बुलढाणा में शिवसेना का मोर्चा, अरविंद सावंत ने पूछा उद्योगपतियों का कर्ज माफ तो किसानों का पुनर्गठन क्यों
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बुलढाणा में मंगलवार को शिवसेना ने सूखे की मदद के मुद्दे पर बड़ा मोर्चा निकाला। पार्टी की तरफ से मांग की गई कि किसानों को सरसकट हेक्टेयर पर 1 लाख रुपये की मदद दी जाए। मोर्चे में हाथ में झुलसा हुआ सोयाबीन लिए किसान शामिल हुए। कुछ किसान ट्रैक्टर और बैलगाड़ी लेकर आए थे और उनके हाथ में मदद की मांग वाले फलक थे। ये किसान राज्य सरकार के शासन निर्णय के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, जिसे उन्होंने फसाने वाला बताया।

खबर के मुताबिक बुलढाणा जिले में ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र में बारिश का लंबा खंड पड़ा और खरीफ का सीजन किसानों के हाथ से चला गया। सरकार ने कोरड़े सूखे की घोषणा की है, लेकिन शिवसेना का कहना है कि शब्दों का खेल करते हुए यह नहीं बताया गया कि आखिर मदद क्या मिलेगी। इसी नीति के विरोध में पार्टी ने यह मोर्चा निकाला।

मोर्चा जिजामाता प्रेक्षागार मैदान से निकला। निकलने से पहले मैदान में हजारों किसान मौजूद थे और शिवसेना नेताओं ने उन्हें संबोधित किया। नेताओं ने गंभीर चेतावनी दी कि जब तक किसानों को सीधी मदद नहीं मिलती, यह लड़ाई नहीं रुकेगी।

सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि किसानों का आक्रोश लेकर हम यह मोर्चा लाए हैं। उनके मुताबिक देश में जब पहली बार संकट दिखा, तब शिवसेना के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे सबसे पहले इस पर बोले थे और उन्होंने विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग भी की थी। सावंत ने केंद्र और राज्य सरकार की कर्जमाफी की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज में रियायतें दी जा रही हैं, जबकि किसानों की कर्जमाफी के लिए शर्तें और मानदंड लगाए जा रहे हैं। सावंत ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनते ही सभी किसानों को दो लाख रुपये तक की कर्जमुक्ति दी थी। उन्होंने सवाल किया कि मौजूदा सरकार उद्योगपतियों का कर्ज माफ करती है, तो किसानों के मामले में पुनर्गठन का फैसला क्यों। सावंत ने यह भी कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की तरफ से जिला और तालुका स्तर पर किसान मदद केंद्र बनाए जाएंगे, जिनसे आने वाले समय में किसानों को राहत देने का काम होगा।

विधायक सिद्धार्थ खरात ने कहा कि फडणवीस सरकार ने सिर्फ एक निर्णय निकालकर सूखा घोषित कर दिया, पर उस निर्णय में यह नहीं बताया कि सूखे में कौन सी मदद की जाएगी। उनके मुताबिक इससे किसानों में भारी असंतोष है। खरात ने मांग की कि पंचनामे का नाटक बंद करके नुकसान भरपाई घोषित की जाए।

राज्य प्रवक्ता जयश्री शेळके ने सरकार के कारभार की पोल खोली। उन्होंने कहा कि महायुती सरकार किसानों को टरकाने का काम कर रही है और आने वाले समय में यह असंतोष इस सरकार को सत्ता से पलट देगा। जिलाप्रमुख जालिंदर बुधवत ने कहा कि शिवसेना हमेशा किसानों के साथ है।

विधायक नितीन देशमुख ने कहा कि 30 साल में ऐसा संकट नहीं आया। उनके मुताबिक शाम को चूल्हा कैसे जलेगा, ऐसी हालत आज किसानों के घरों में है। देशमुख ने कहा कि भाजपा सरकार जबसे सत्ता में आई है, तबसे सिर्फ जुमलेबाजी चल रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगे गए, तो अब सूखे के वक्त मदद की उम्मीद है, क्या किसान हिंदू नहीं हैं। देशमुख ने कहा कि आज किसानों और खेतमजूरों के बच्चों को रोजगार नहीं है और सूखे से हालात और भीषण होंगे। उनका कहना था कि शिवसेना सड़क पर उतरी और पश्चिम विदर्भ से मार्च शुरू हुए, तब सरकार को जाग आई। लेकिन निकाले गए शासन निर्णय में क्या है, यह राज्य सरकार ने नहीं बताया। देशमुख ने कहा कि शिवसेना सड़क की यह लड़ाई आने वाले समय में और तेज करेगी और जरूरत पड़ी तो समृद्धी महामार्ग रोकने की चेतावनी भी उन्होंने दी।

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