मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:26 IST

बुलढाणा के अमडापूर में बारिश नहीं होने से सोयाबीन-तुअर बर्बाद, खेतों में पंचनामे शुरू

बुलढाणा के अमडापूर इलाके में बारिश की कमी से खरीफ की सोयाबीन और तुअर की फसल को भारी नुकसान हुआ है। राजस्व और कृषि विभाग ने बुधवार से तालुका में सर्वे और पंचनामे शुरू किए हैं।

बुलढाणा के अमडापूर में बारिश नहीं होने से सोयाबीन-तुअर बर्बाद, खेतों में पंचनामे शुरू
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बुलढाणा में किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। बारिश ने खींच लिया, इसलिए खरीफ सीजन की सोयाबीन और तुअर की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। नुकसान झेल रहे किसानों को राहत दिलाने के लिए राजस्व और कृषि विभाग ने बुधवार से तालुका में फसल नुकसान का सर्वे और पंचनामे शुरू कर दिए हैं।

अमडापूर इलाके के खेतों में जाकर देखा गया तो तस्वीर बहुत खराब मिली। सोयाबीन की फलियां खोखली हैं, तुअर की बढ़त रुक गई है और फसलें झुलस चुकी हैं।

पंचनामे सचमुच खेत की मेड़ पर हो रहे हैं या सिर्फ कागजों में, यह जांचने के लिए राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ अमडापूर इलाके के कई खेतों का दौरा किया गया। इस मौके पर अमडापूर भाग एक के ग्राम राजस्व अधिकारी गणेश खोडवे, भाग दो के राहुल जाधव, भाग तीन के भूषण काळे, सहायक कृषि अधिकारी योगेश सरोदे और सुषमा गई, ग्रामपंचायत अधिकारी शरद काळे, उपसरपंच, प्रशांत पाखरे, राम जाधव, गणेश माळोदे, राम देशमुख, भागवत सोनुने, माधव धंदाळे, प्रताप कौसे समेत कई लोग मौजूद थे। हाथ में आया खरीफ सीजन बारिश के बिना बर्बाद हो गया, इसलिए किसान आर्थिक संकट में हैं और पंचनामों से उन्हें नुकसान भरपाई की उम्मीद है।

कुछ किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है। उन्होंने फसल बचाने की कोशिश की, इसलिए कुछ जगह फसल ऊपर से हरी-भरी दिखती है। लेकिन सोयाबीन की फलियों के अंदर के दाने छोटे और कमजोर हैं। किसानों ने अंदाजा जताया कि ऐसे खेतों से भी एकड़ पीछे ज्यादा से ज्यादा तीन क्विंटल सोयाबीन मिलेगा। ऊपर से रात में कम दबाव से बिजली की सप्लाई होती है और ट्रांसफॉर्मर बार-बार जल जाते हैं, जिससे सिंचाई में भी रुकावट आई। किसानों ने बताया कि पानी की सुविधा होने पर भी उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं हुआ।

अमडापूर भाग तीन के गट क्रमांक 1185 में किसान साहेबराव गवई ने दो हेक्टेयर में सोयाबीन और तुअर बोई थी। बारिश न होने से सोयाबीन की फसल पूरी तरह झुलस गई है। जो थोड़े पौधे खड़े हैं, उनकी फलियों में दाने भरे ही नहीं, सिर्फ फलियों का छिलका बचा है। गवई ने अपनी व्यथा बताई कि कटाई का खर्च भी नहीं निकलेगा, इसलिए कटाई करना परवड़ता नहीं और अब इस फसल पर हल चलाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा।

भाग दो के गट क्रमांक 2011 में किसान शाम बन्सी मानकर ने 5 हेक्टेयर 19 आर क्षेत्र में सोयाबीन और तुअर लगाई थी। बारिश की कमी से हुए नुकसान की जानकारी देते हुए मानकर की आंखें भर आईं। उन्होंने दर्द भरी मांग रखी, "साहब, हमारी व्यथा सरकार तक पहुंचाइए और नुकसान भरपाई दिलवाइए।"

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