बुलढाणा: ग्रामीण आवास योजना में 84 हजार घर अधूरे, 324 करोड़ की किस्तें अटकीं
प्रधानमंत्री आवास योजना के दूसरे चरण में बुलढाणा जिले के 1 लाख 3 हजार 412 मंजूर घरों में से सिर्फ 19 हजार 408 पूरे हुए हैं।
बुलढाणा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में हर परिवार को अपना पक्का घर देने का वादा अब तक अधूरा है। योजना के दूसरे चरण में मंजूर 1 लाख 3 हजार 412 घरों में से सिर्फ 19 हजार 408 घर पूरे हो पाए हैं। बाकी 84 हजार 4 घरकुलों का काम अब भी अधूरा पड़ा है।
इसका सीधा मतलब यह है कि इन लाभार्थियों के सिर पर अपने घर की छत कब आएगी, इसका इंतजार खत्म नहीं हो रहा। आरोप लग रहे हैं कि गरीबों को अपना घर देना सरकार का मकसद है, लेकिन योजना को लागू करने वाली व्यवस्था ही उसमें रुकावट डाल रही है।
बुलढाणा जिले में 2024-25 और 2025-26 के दौरान 1 लाख 3 हजार 452 घरकुलों को मंजूरी मिली थी। लेकिन सभी घरों को काम पूरा करने के लिए बराबर समय नहीं मिला।
इन लाभार्थियों के पहले तीन हप्तों के 324.01 करोड़ रुपये अब तक अटके हुए हैं। सरकार घरकुल के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये का अनुदान देती है, जो चार हप्तों में मिलता है: 15 हजार, 70 हजार, 30 हजार और 5 हजार रुपये। इनमें से शुरुआती तीन हप्तों की रकम रुकी हुई है।
लाभार्थियों की शिकायत है कि जो रकम मिलती है, वह वैसे ही कम है। ग्रामीण इलाके के लिए करीब 1 लाख 20 हजार रुपये और शहरी इलाके के लिए 2 लाख रुपये तक का प्रावधान है। आज के निर्माण खर्च को देखते हुए इतने पैसों में घर खड़ा करना लाभार्थियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। रकम कम हो और हप्ते भी अटके हों, तो घर बनाएं कैसे, यह सवाल उनके सामने खड़ा है।
देरी सिर्फ निधि की वजह से नहीं दिखती। कागजात की जांच, प्रस्तावों की पूर्ति, मंजूरी के बाद की कार्रवाई, काम का निरीक्षण और हप्तों के लिए जरूरी प्रक्रिया, इन सबके चलते भी लाभार्थियों को इंतजार करना पड़ रहा है। यानी निधि की देरी के साथ-साथ प्रशासनिक प्रक्रिया का असर भी घरकुलों पर पड़ता दिख रहा है।