गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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ब्रिक्स समिट में रूसी नेता बोले, रूस-यूक्रेन जंग रोकने में भारत निभा सकता है बड़ा रोल

दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स समिट के बीच रूस के कुर्स्क प्रांत के विधायक अभय कुमार सिंह ने कहा कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में अहम मध्यस्थ बन सकता है।

ब्रिक्स समिट में रूसी नेता बोले, रूस-यूक्रेन जंग रोकने में भारत निभा सकता है बड़ा रोल
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दुनिया की राजनीति में इन दिनों भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक कौशल की खूब चर्चा हो रही है। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले कई महीनों से चल रही भीषण जंग ने पूरी दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल मचा रखी है, और इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कोशिशें हो रही हैं। इसी माहौल में रूस के राजनीतिक हलकों से एक सुर उठ रहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में तोड़ निकालने और दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने में भारत बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है।

दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स समिट (BRICS Summit 2026) के दौरान यह मुद्दा और भी अहम हो गया है। इस समिट में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत दुनिया भर के कई बड़े नेता जमा हुए हैं। जहां वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत हो रही है, वहीं यूक्रेन जंग का मुद्दा भी इसमें केंद्र में बना हुआ है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से बातचीत के जरिए शांति कायम करने की बात करते रहे हैं। इसी नीति को दोहराते हुए रूस में भारतीय मूल के जनप्रतिनिधि अभय कुमार सिंह ने भारत की संभावित भूमिका पर खुलकर बात की है।

रूस के कुर्स्क प्रांत की विधानसभा में डेप्युटेट (प्रतिनिधि) के तौर पर काम कर रहे और रूस की सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े अभय कुमार सिंह ने भारत-रूस रिश्तों और यूक्रेन संकट पर अहम बयान दिया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस को उम्मीद है कि भारत रूस-यूक्रेन जंग रोकने और दोनों देशों को समझौते के करीब लाने में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएगा, तो उन्होंने भारत की वैश्विक ताकत की जमकर तारीफ की।

अभय कुमार सिंह ने कहा, "रूस और यूक्रेन के बीच जंग खत्म कराने में भारत बड़ी और निर्णायक भूमिका निभा सकता है।" उनके मुताबिक, भारत की छवि दुनिया भर में एक तटस्थ, शांतिप्रिय और जिम्मेदार देश की है, और इसी वजह से भारत दोनों देशों के बीच एक पुल का काम कर सकता है और शांति के लिए सही माहौल बना सकता है।

जंग के भविष्य पर बात करते हुए अभय कुमार सिंह ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "अगर हम इंसानी इतिहास पर नजर डालें तो साफ है कि दुनिया में हुई कोई भी जंग सिर्फ फौजी ताकत से हमेशा के लिए खत्म नहीं हुई। आखिर में सारी जंगें शांति समझौते और बातचीत से ही खत्म हुई हैं। इसलिए रूस-यूक्रेन विवाद का अंत भी समझौते से ही होगा।" उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत रूस और यूक्रेन दोनों को एक-दूसरे के हित और सम्मान वाली शर्तें रखने में मदद करे, तो दोनों देश उसका सकारात्मक जवाब दे सकते हैं। भारत के दोनों देशों से जो रिश्ते हैं, उन्हें देखते हुए भारत इस समझौते में बेहद अहम मध्यस्थ बन सकता है, ऐसा भरोसा उन्होंने जताया।

इस बातचीत में अभय कुमार सिंह ने भारत और रूस की पुरानी दोस्ती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते सिर्फ दो सरकारों के बीच के औपचारिक समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह नाता पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है, भरोसे पर टिका है और ऐतिहासिक है। मुश्किल वक्त में रूस हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है, और भारत ने भी दुनिया के मंच पर रूस के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखे हैं। नई दिल्ली में हो रही उच्च स्तरीय बैठकों और नेताओं की मुलाकातों से दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक, ऊर्जा और तकनीक क्षेत्र में सहयोग और मजबूत होगा। बहुध्रुवीय दुनिया में भारत और रूस का सहयोग सिर्फ एशिया के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के स्थायित्व के लिए जरूरी है, यह राय उन्होंने रखी।

ब्रिक्स मंच को दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति को नई दिशा देने के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। पश्चिमी देशों के आर्थिक दबाव का जवाब देने और विकासशील देशों की आवाज उठाने के लिए ब्रिक्स के देश साथ आए हैं। इस समिट में भारत ने जो शांति की भूमिका अपनाई है, उसकी दुनिया भर में तारीफ हो रही है। रूस-यूक्रेन जंग से दुनिया की खाद्य सुरक्षा, ईंधन आपूर्ति और सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा है, ऐसे में अगर भारत जैसा असरदार देश मध्यस्थता करे तो पूरी दुनिया को इससे राहत मिल सकती है। अभय कुमार सिंह के इस बयान से भारत की कूटनीति और मध्यस्थता की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से नई ताकत मिली है।

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