BRICS समिट: मोदी के गाला डिनर में जिनपिंग नहीं पहुंचे, कयास तेज
भारत में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पीएम मोदी के गाला डिनर में शामिल नहीं हुए, जिसे लेकर राजनयिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
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भारत में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से रखे गए गाला डिनर में शिरकत नहीं की। जिनपिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंचे थे और उन्होंने BRICS परिषद में हिस्सा भी लिया, साथ ही पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। लेकिन इसके बाद भारत मंडपम में हुए खास गाला डिनर में वे नहीं दिखे। उनकी इस गैरमौजूदगी ने राजनीतिक और राजनयिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है।
BRICS परिषद के दौरान मोदी और जिनपिंग के बीच एक अहम बैठक हुई, जिसमें भारत-चीन रिश्ते, सीमा विवाद, व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। दोनों देशों ने मतभेदों को संभालते हुए रिश्तों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साल 2020 के बाद से तनावपूर्ण रहे भारत-चीन संबंधों में पिछले कुछ समय से सावधानी के साथ सुधार की कोशिशें चल रही हैं।
जिनपिंग आखिर डिनर में क्यों नहीं पहुंचे, इसकी कोई आधिकारिक वजह अभी तक भारत या चीन की ओर से सामने नहीं आई है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, दिनभर चली BRICS बैठकों और मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय चर्चा के बाद वे आराम करने के लिए होटल लौट गए होंगे। इसलिए फिलहाल उनकी गैरमौजूदगी को सीधे तौर पर किसी राजनयिक नाराजगी से जोड़ना ठीक नहीं होगा।
गौरतलब है कि जिनपिंग के अलावा अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद जायद अल नाहयान भी इस डिनर में मौजूद नहीं थे। वे BRICS परिषद के बाद यूएई रवाना हो गए थे। इसलिए जिनपिंग की गैरमौजूदगी को अकेले किसी राजनयिक संकेत के तौर पर देखने से पहले बाकी पहलुओं पर भी गौर करना जरूरी है।
पीएम मोदी की ओर से आयोजित इस गाला डिनर में BRICS देशों के नेता, शामिल देशों के प्रतिनिधि और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि पहुंचे थे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई बड़ी हस्तियां इस कार्यक्रम में मौजूद रहीं। मेहमानों को भारतीय खानपान का खास अनुभव देने के लिए पनीर लबाबदार, मिलेट पुलाव, खांडवी, खुंब गलौटी और शहतूत फिरनी जैसे पकवान परोसे गए।
जिनपिंग का डिनर में शामिल न होना भले ही चर्चा का विषय बन गया हो, लेकिन इसके पीछे कोई राजनयिक वजह होने की बात अभी तक आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है। खास बात यह भी है कि उसी दिन मोदी और जिनपिंग के बीच सीधी द्विपक्षीय बातचीत हुई थी, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है।