भारतीय सोलर पैनल पर अमेरिका ने ठोका 123 फीसदी टैरिफ, BRICS से बढ़ी नाराजगी की चर्चा
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर सेल और पैनल पर भारी एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग शुल्क लगा दिया है, अब 14 अक्टूबर को USITC का फैसला अहम रहेगा।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया भर में भारत की बढ़ती ताकत और BRICS परिषद की गतिविधियों की चर्चा हर तरफ चल रही है, और इसकी हवा अब अमेरिका तक पहुंचती दिख रही है। कहा जा रहा है कि इसी से बेचैन होकर अमेरिका ने भारतीय उद्योगों को बड़ा झटका दे दिया है। भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी सीधे नजर आ रही है।
भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात होने वाले सोलर सेल और सोलर पैनल पर भारी टैरिफ लगाने का फैसला लिया गया है, और इसी से यह नाराजगी झलकती है। अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने इन देशों के उत्पादकों पर सस्ते माल की डंपिंग करने और सरकारी सब्सिडी का गलत फायदा उठाने का आरोप लगाया है।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारतीय सोलर उत्पादकों पर 123.04 फीसदी एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया है। इसके अलावा भारतीय कंपनियों पर 126.09 फीसदी काउंटरवेलिंग शुल्क भी लगाया गया है। इंडोनेशियाई उत्पादकों के लिए एंटी-डंपिंग शुल्क 94.36 फीसदी रखा गया है, जबकि लाओस के उत्पादकों के लिए यह 65.43 फीसदी है। काउंटरवेलिंग शुल्क की बात करें तो इंडोनेशिया पर 73.2 फीसदी से लेकर 173.7 फीसदी तक और लाओस पर 82.03 फीसदी से लेकर 153.67 फीसदी तक शुल्क लगाया गया है।
यह व्यापार जांच अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड की शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी। इस अलायंस में फर्स्ट सोलर, हनवा क्यूसेल्स और मिशन सोलर एनर्जी जैसी बड़ी अमेरिकी सोलर कंपनियां शामिल हैं। अमेरिकी सोलर उत्पादकों के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना इस अलायंस का मकसद बताया गया है। संस्था के मुताबिक ये फैसले अमेरिका के व्यापार कानूनों को लागू करने और देश के सोलर उद्योग तथा उसके मजदूरों को सुरक्षा देने की दिशा में उठाए गए अहम कदम हैं।
अमेरिका का अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोग यानी USITC अब 14 अक्टूबर को इस मामले में अपना आखिरी फैसला सुनाएगा। आयोग यह तय करेगा कि भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात हो रहे सोलर उत्पादों से अमेरिका के घरेलू उत्पादकों को अभी या आगे चलकर कोई नुकसान हुआ है या नहीं। अगर आयोग यह मान लेता है कि आयात से नुकसान हुआ है, तो अमेरिका का वाणिज्य विभाग नवंबर में अंतिम शुल्क आदेश जारी कर सकता है।
अमेरिका और चीन के बीच सोलर एनर्जी को लेकर व्यापार विवाद कोई नई बात नहीं है, यह बरसों से चला आ रहा है। अमेरिका ने 2012 में सबसे पहले चीनी सोलर उत्पादों पर एंटी-डंपिंग और एंटी-सब्सिडी शुल्क लगाया था। इसके बाद कई चीनी कंपनियों ने चीन से अपना उत्पादन दूसरे एशियाई देशों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया। अब भारत, इंडोनेशिया और लाओस से होने वाले सोलर आयात पर भारी शुल्क लगाने के फैसले से इन देशों के सोलर उत्पादकों पर अमेरिकी बाजार में कारोबार करने का दबाव बढ़ सकता है।