भामरागड़ में पर्लकोटा नदी का पुराना पुल जलमग्न, तहसील का संपर्क टूटा
गडचिरोली जिले में लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद भामरागड़ में NH-130D पर बना पुराना पुल पानी में डूब गया, प्रशासन ने पुल के दोनों तरफ पुलिस बंदोबस्त लगाकर यातायात रोका।
गडचिरोली जिले में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश ने दक्षिण गडचिरोली की नदियों और नालों का पानी तेजी से बढ़ा दिया है। इसी का असर भामरागड़ क्षेत्र में साफ दिखा, जहां पर्लकोटा नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि NH-130D पर बना पुराना पुल पूरी तरह पानी में डूब गया। इस वजह से भामरागड़ तहसील का बाकी इलाकों से संपर्क कट गया है।
यह रिपोर्ट सेवा पवार ने भामरागड़, गडचिरोली से भेजी है।
पड़ोसी छत्तीसगढ़ राज्य में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। वहां इंद्रावती नदी के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश जारी है, जिसके चलते इंद्रावती नदी का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। जगदलपुर और चिंतनार के नदी मापन केंद्रों से भी यही जानकारी मिली है कि वहां नदी का जलस्तर खतरे के स्तर तक पहुंच चुका है।
भामरागड़ में पर्लकोटा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में गुरुवार शाम से मूसलाधार बारिश हो रही थी, जिसकी वजह से नदी का पानी अचानक तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही देर में पानी पुराने पुल के ऊपर से बहने लगा और देखते ही देखते पूरा पुल पानी में डूब गया।
पुल जलमग्न होते ही लोगों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया, इसलिए पुलिस ने पुल के दोनों छोर पर बंदोबस्त लगा दिया है। किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए बैरिकेडिंग करके वहां से आना-जाना पूरी तरह रोक दिया गया है। प्रशासन नदी के जलस्तर और इलाके की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि कोई भी डूबे हुए पुल से गुजरने की कोशिश न करे।
बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन कक्ष ने भामरागड़ तहसील के अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर इंद्रावती और पर्लकोटा नदी के किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वालों से खास एहतियात बरतने की अपील की गई है। प्रशासन ने साफ कहा है कि कोई भी नदी के पाट में न जाए और तेज बहाव वाले पानी में उतरने से बचे।
इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को भी पहले से जरूरी सावधानी बरतने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। प्रशासन को आशंका है कि अगर पर्लकोटा नदी का पानी और बढ़ता है, तो इलाके की यातायात व्यवस्था के साथ-साथ लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन पूरी स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है।