भाजप में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, तावडे को UP तो बैजयंत पांडा को महाराष्ट्र का प्रभार
भाजप ने देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सहप्रभारी घोषित किए, जिसमें महाराष्ट्र के चार नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिली है।
भाजप ने अपने देशभर के पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सहप्रभारियों की नई नियुक्तियां जाहीर कर दी हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नबीन की अगुवाई में हुए इस फेरबदल में 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जिम्मेदारियां बांटी गई हैं।
इस नई सूची में महाराष्ट्र के चार नेताओं को दूसरे राज्यों में अहम संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावडे को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए तावडे को यह जिम्मेदारी दी गई है, और वे पहले से ही राज्य में संगठनात्मक बैठकों में सक्रिय रहे हैं।
राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी को उत्तर प्रदेश का सहप्रभारी बनाया गया है। उनके साथ जगदीश पटेल, प्रदीप शर्मा और अनंत ओझा को भी सहप्रभारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा विनय सहस्रबुद्धे को दिल्ली भाजप का प्रभारी बनाया गया है, तो महाराष्ट्र की पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार को गोवा का प्रभारी बनाया गया है। गोवा में अनिल एंटनी सहप्रभारी होंगे।
महाराष्ट्र भाजप के प्रभारी पद की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद बैजयंत जय पांडा को दी गई है। महाराष्ट्र के लिए अमित मालवीय, सदानंद शेट तानावडे और कमलजीत सहरावत को सहप्रभारी नियुक्त किया गया है।
इस फेरबदल में स्मृती इरानी को हरियाणा और छत्तीसगढ़, दोनों राज्यों का प्रभारी बनाया गया है। हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक की, तो राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड की जिम्मेदारी दी गई है। सुनील बंसल को तेलंगाना और पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया गया है।
तरुण चुघ को गुजरात, श्रीकांत शर्मा को हिमाचल प्रदेश, सतीश पूनिया को जम्मू-कश्मीर और पंजाब, तो डी. पुरंदेश्वरी को ओडिशा की जिम्मेदारी दी गई है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए वहां संगठनात्मक तैयारी पहले से ही चल रही है। विनोद तावडे सितंबर में लखनऊ, गोरखपुर समेत कई इलाकों में बैठकें कर संगठनात्मक तैयारी का जायजा ले चुके हैं। इस वजह से इन नई नियुक्तियों को आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।