मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:46 IST

बेला में देवराई के लिए जगह: सयाजी शिंदे के सवाल के बाद वन विभाग ने दी मंजूरी

नागपुर की बेला ग्रामपंचायत के वृक्षारोपण प्रस्ताव पर वन विभाग ने पहले मना किया था। अभिनेता सयाजी शिंदे के मुताबिक अब अधिकारियों ने वृक्षारोपण की बात मान ली है।

बेला में देवराई के लिए जगह: सयाजी शिंदे के सवाल के बाद वन विभाग ने दी मंजूरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर जिले की बेला ग्रामपंचायत के वृक्षारोपण के प्रस्ताव पर वन विभाग ने पहले हाथ खड़े कर दिए थे। अधिकारियों का कहना था कि मांगी गई जगह राखीव वनक्षेत्र (Reserved Forest Area) की है, इसलिए वहां देवराई नहीं बन सकती और पेड़ लगाने की परवानगी भी नहीं दी जा सकती। इस पर मशहूर फिल्म अभिनेता और 'सह्याद्री देवराई फाउंडेशन' के प्रमुख सयाजी शिंदे ने गुस्से में सवाल उठाया था कि पेड़ लगाने के लिए परवानगी का बंधन क्यों है।

मामला यह था कि बेला ग्रामपंचायत ने अपने गांव के पास सयाजी शिंदे के फाउंडेशन के साथ मिलकर सह्याद्री देवराई के लिए वन विभाग से जगह मांगी थी। वन विभाग ने वह जगह देने से मना कर दिया। दूसरी तरफ सयाजी शिंदे और उनके साथियों का आरोप था कि जिस जगह को वन विभाग राखीव वनक्षेत्र बता रहा है, वहां एक भी पेड़ नहीं है। उनके मुताबिक कुछ लोगों ने वहां अतिक्रमण करके नियम तोड़ते हुए खेती शुरू कर दी है।

इस मामले के सामने आने के बाद आज सयाजी शिंदे ने नागपुर में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। शिंदे का दावा है कि इस मुलाकात में अधिकारियों ने माना कि वन क्षेत्र में वृक्षारोपण नहीं किया जा सकता, ऐसा कोई नियम है ही नहीं।

शिंदे ने बताया कि वन विभाग के इस गलत रवैये को लेकर ही वे अधिकारियों से मिले थे। उनके मुताबिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बेला गांव के पास की उस जगह पर वृक्षारोपण किया जाएगा और वहां का अतिक्रमण वन विभाग हटाएगा। शिंदे ने यह भी कहा कि वे उसी जगह पर अतिरिक्त 25 एकर जमीन की मांग करेंगे।

सयाजी शिंदे ने साफ किया कि कौन गलत है और कौन सही, इस बहस में वे अब नहीं पड़ेंगे। उनका ध्यान ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि विदर्भ में भी अब कई देवराइयां खड़ी की जाएंगी। आने वाले कुछ समय में सौ देवराइयां बनाने की कोशिश है, और हर देवराई में कम से कम 500 प्रजातियों के पेड़ हों, यह उनका प्रयास रहेगा।

शिंदे ने कहा कि पिछले 100 सालों में हमने भारी पेड़कटाई करके बहुत बड़ा नुकसान कर लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कम से कम अभी के सूखे जैसे हालात को देखते हुए हम वृक्षारोपण को लेकर गंभीर होंगे।

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