अक्टूबर में रेड बॉल का रोमांच! इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए भिड़ेंगे, कमान देवदत्त पडिक्कल के हाथ
पुदुच्चेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ होने वाली चार दिवसीय मैचों की सीरीज के लिए देवदत्त पडिक्कल को इंडिया ए की कप्तानी सौंपी गई है।
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भारत के युवा बैट्समैन देवदत्त पडिक्कल को इंडिया ए टीम की कप्तानी सौंप दी गई है। पुदुच्चेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ होने वाली चार दिवसीय मैचों की सीरीज के लिए यह जिम्मेदारी उन्हें दी गई है, और पडिक्कल ने इस नई और अहम जिम्मेदारी पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है।
दरअसल इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए के बीच जल्द ही रेड बॉल सीरीज खेली जानी है, और इसी सीरीज के लिए पडिक्कल को इंडिया ए की कमान थमाई गई है। बताया जा रहा है कि श्रीलंका के खिलाफ उनकी शानदार और बड़ी बैटिंग परफॉर्मेंस को देखते हुए ही उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। यानी अपनी बैटिंग से जो भरोसा उन्होंने पिछली सीरीज में जीता, उसी का इनाम उन्हें इस कप्तानी के रूप में मिला है।
25 साल के देवदत्त पडिक्कल पहले भी घरेलू क्रिकेट में अपनी बैटिंग के दम पर छाप छोड़ चुके हैं, यानी यह पहली बार नहीं है जब उनके बैट ने बड़े मंच पर बोलना शुरू किया हो। हाल ही में हुई श्रीलंका टेस्ट सीरीज में भी उनकी बैटिंग शानदार रही थी, जिसमें दोनों टेस्ट मैचों में उन्होंने सेंचुरी जमाई। कप्तानी का उनका पहला बड़ा अनुभव 2025-26 के रणजी ट्रॉफी सीजन में मिला था, जब सीजन के दूसरे हिस्से में कर्नाटक टीम की कप्तानी उन्हें दी गई थी। यानी घरेलू क्रिकेट में मिली इस जिम्मेदारी ने ही उनके लिए इंडिया ए की कप्तानी तक का रास्ता तैयार किया।
कप्तानी के अनुभव पर बात करते हुए पडिक्कल ने कहा कि पिछले सीजन में कर्नाटक टीम की कमान संभालते हुए उन्होंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने भरोसा जताया कि घरेलू क्रिकेट में मिला वह अनुभव अब इंडिया ए की कप्तानी करते वक्त बहुत काम आएगा, यानी कर्नाटक की कप्तानी में सीखी गई बातें अब आगे उनके काम आने वाली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नेतृत्व की जिम्मेदारी उठाना उन्हें दिल से पसंद है।
देवदत्त पडिक्कल को इंडिया ए की कप्तानी मिलने के पीछे मुख्य वजह रेड बॉल क्रिकेट में उनका बेहतरीन फॉर्म बताया जा रहा है। हाल ही में हुई श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पडिक्कल भारतीय टीम के सबसे सफल बैट्समैन रहे थे। इस सीरीज में उन्होंने केवल 3 इनिंग्स में 109.33 की जबरदस्त औसत से कुल 328 रन बनाए, जिसमें दो शानदार सेंचुरी शामिल थीं। यानी उनकी बैटिंग का यही असाधारण फॉर्म ही अब उन्हें इंडिया ए की अगुवाई तक ले आया है।