गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:08 IST

आटा गूंथने के बाद उंगलियों के निशान क्यों बनाए जाते हैं, जानिए मान्यता

आटा गूंथने के बाद उंगलियों के निशान क्यों बनाए जाते हैं, जानिए मान्यता
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

रसोई में बड़ी-बुजुर्ग महिलाओं को आपने अक्सर देखा होगा कि आटा गूंथने के बाद वो उस पर उंगलियों से हल्के निशान बना देती हैं। देखने में यह एक मामूली आदत लगती है, लेकिन सनातन परंपरा और ज्योतिष से जुड़ी मान्यताओं में इस छोटी सी प्रक्रिया को खास महत्व दिया गया है। आज भी बहुत से घरों में आटे को पूरी तरह गोल और चिकना रखने की बजाय उस पर उंगलियों के निशान बनाए जाते हैं। इसकी वजह पितरों, अन्न की पवित्रता और घर में सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मान्यताएं बताई जाती हैं। हालांकि इन परंपराओं के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, इन्हें धार्मिक और लोक-परंपरा के तौर पर ही समझा जाना चाहिए।

ज्योतिष और सनातन परंपराओं में अन्न को सिर्फ भोजन नहीं बल्कि समृद्धि और जीवन का आधार माना जाता है। गेहूं का आटा खासतौर पर घर की रोजमर्रा की रसोई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि रसोई में रखे अन्न पर घर के माहौल और ऊर्जा का असर पड़ता है। इसी वजह से कई परिवारों में गूंथे हुए आटे को लंबे समय तक पूरी तरह गोल और चिकनी शक्ल में नहीं रखा जाता। इस मान्यता को मानने का एक छोटा सा तरीका आटे पर उंगलियों के निशान बनाना माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरी तरह गोल और चिकने आटे की शक्ल को पिंड जैसा माना जाता है। हिंदू परंपरा में पिंड का संबंध श्राद्ध और तर्पण यानी पितरों को अर्पण किए जाने वाले विधियों से है। इसी कारण कुछ मान्यताओं के मुताबिक घर में गूंथे आटे को पूरी तरह गोल आकार में रखना उचित नहीं समझा जाता। उस पर उंगलियों के निशान बना देने से आटे की गोल शक्ल बिगड़ जाती है। धार्मिक तौर पर इसे रोज के खाने के लिए आटा तैयार करने का एक तरीका माना जाता है, हालांकि यह एक पारंपरिक मान्यता ही है जिसे हर परिवार अपने रीति-रिवाज के हिसाब से अलग नजरिए से देखता है।

ज्योतिष की राय के अनुसार रसोई को घर की एक अहम जगह माना जाता है। अन्न और अनाज परिवार की समृद्धि से जुड़े हुए हैं। ऐसे में रसोई की सफाई रखना और अन्न का सम्मान करना शुभ माना जाता है। बहुत से लोग मानते हैं कि रोटी बनाने के लिए आटे पर उंगलियों के निशान बनाना अन्न के प्रति आदर का प्रतीक है। इसे देवी अन्नपूर्णा के आशीर्वाद और घर की समृद्धि से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जिस घर में अन्न का अनादर नहीं होता और भक्तिभाव से खाना बनाया जाता है, वहां सकारात्मक माहौल बना रहता है।

कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोल आटे की शक्ल और पिंड की शक्ल में समानता को पितरों से जोड़ा जाता है। इसी आधार पर कहा जाता है कि आटे को गोल आकार में रखने की बजाय उसकी सतह पर उंगलियों के निशान बना देने चाहिए। हालांकि यह समझना जरूरी है कि सिर्फ आटे पर उंगलियों के निशान बनाने से पितृदोष ठीक हो सकता है, ऐसा कोई सिद्ध ज्योतिषीय नियम नहीं है। कुंडली विश्लेषण और उससे जुड़े धार्मिक विधि-विधानों में पितृदोष जैसी ज्योतिषीय अवधारणाओं को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मौजूद हैं।

इस परंपरा के पीछे एक व्यावहारिक पहलू भी हो सकता है। पुराने जमाने में आटा घर में ही गूंथकर रखा जाता था। उस पर हाथ या उंगलियों के निशान बना देने का मतलब यह होता था कि आटा गूंथकर तैयार हो गया है और रोटी बनाने के लिए एकदम रेडी है। आज रसोई के तरीके बदल गए हैं, फिर भी बहुत सी पुरानी घरेलू आदतें आज भी परिवारों में चली आ रही हैं। इसलिए इस परंपरा को एक धार्मिक मान्यता और एक पुरानी घरेलू आदत, दोनों नजरियों से देखा जा सकता है।

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