आरबीआई के चार कदमों के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया 95.76 पर खुला
सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले पिछली कीमत से 1 रुपये मजबूत हुआ।
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काफी दिनों से डॉलर के सामने जूझ रहे रुपये को सोमवार को राहत मिली। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछली कीमत से 1 रुपये मजबूत हुआ। शुक्रवार को रुपया 96.73 पर बंद हुआ था, जबकि सोमवार को वह 97 पैसे बढ़कर डॉलर के मुकाबले 95.76 पर खुला। एशियाई करेंसियों में रुपये का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा रहा, जबकि ज्यादातर दूसरी करेंसियां सीमित दायरे में कारोबार कर रही थीं।
भारतीय करेंसी पर दबाव डालने वाले दो बड़े कारण थे। पहला, स्पॉट मार्केट में तेल कंपनियों की डॉलर की मांग। दूसरा, रुपया और कमजोर होने की आशंका को देखते हुए कंपनियों के लगाए हेजिंग बेट्स। इन दोनों से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ अहम कदम उठाए।
हफ्ते के आखिर में आरबीआई ने चार उपायों का ऐलान किया था। इनमें तीन सरकारी तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर सप्लाई सुविधा, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स पर ज्यादा सख्त पाबंदियां, कुछ खास करेंसी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए 20% कैश रिजर्व की जरूरत और बैंकों के लिए ज्यादा सख्त रोजाना कैश रिजर्व नियम शामिल हैं। इन कदमों से रुपये को फौरी राहत मिली है, फिर भी इस साल अब तक करेंसी 6.6 फीसदी कमजोर हुई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी और कमजोर पूंजी प्रवाह की वजह से रुपये पर दबाव अब भी बना हुआ है।
पहला उपाय विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स के नियमों को लेकर है। आरबीआई ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को रद्द करने और दोबारा दर्ज करने पर रोक लगा दी है, ताकि हेजिंग के नाम पर सट्टेबाजी के लिए ऐसे सौदों का इस्तेमाल न हो सके। जिन ओवर-द-काउंटर विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों में अंतर्निहित जोखिम नहीं है, उनकी सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है। कंपनियों को यह भी प्रमाणित करना होगा कि वही जोखिम किसी दूसरे बैंक के जरिए हेज नहीं किया गया है। अगर उन्होंने कई बैंकों का इस्तेमाल किया है, तो हेज की गई रकम का खुलासा करना होगा, जिससे सिंथेटिक ओवर-हेजिंग की गुंजाइश कम होगी।
दूसरा उपाय सरकारी तेल कंपनियों के लिए है। आज से आरबीआई आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल की पूरी रोजाना डॉलर की जरूरत नियुक्त बैंकों के जरिए पूरी करेगा। इससे इंटरबैंक स्पॉट मार्केट में उनकी मांग घटेगी। नोमुरा के अनुमान के मुताबिक अप्रैल से अगस्त के बीच भारत का मासिक तेल आयात बिल औसतन $16.4 अरब रहा, जिसमें इन तीन सरकारी तेल कंपनियों का हिस्सा करीब 55% था। यानी यह विशेष सुविधा देश की सबसे बड़ी आयात श्रेणियों में से एक से पैदा होने वाली डॉलर की मांग का बड़ा हिस्सा पूरा करती है। इससे स्पॉट मार्केट में सप्लाई और मांग का संतुलन तुरंत सुधरता है और तेल से जुड़ी बड़ी डॉलर खरीद के कारण दिन भर में रुपये की कमजोरी बढ़ने का जोखिम घटता है।
तीसरा उपाय 20% विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व का है। नए नियम के तहत अधिकृत डीलर्स को $2 मिलियन से ज्यादा के हर रुपया-संबंधित विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की रुपया वैल्यू का 20% कैश रिजर्व आरबीआई के पास रखना होगा। यह रिजर्व कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने तक रोज रखना पड़ेगा। $10 मिलियन के हेज के लिए, जिसकी वैल्यू डॉलर के 100 के भाव पर करीब Rs 100 करोड़ होगी, बैंकों को Rs 20 करोड़ अलग रखने होंगे। इससे करेंसी पोजीशन के लिए फंडिंग का खर्च बढ़ता है और रुपये के खिलाफ ज्यादा हेजिंग या सट्टेबाजी हतोत्साहित हो सकती है।
चौथा उपाय रोजाना सीआरआर रखरखाव के सख्त नियमों का है। 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े से बैंकों को पहले के 90% के मुकाबले हर दिन अपनी तय कैश रिजर्व जरूरत (सीआरआर) का कम से कम 99% रखना होगा। मुख्य सीआरआर दर 3% रहेगी, लेकिन बैंकों को रोजाना लिक्विडिटी संभालने में कम लचीलापन मिलेगा। इस फैसले से लिक्विडिटी थोड़ी कम होगी और अल्पकालिक करेंसी सट्टेबाजी पर लगाम लग सकती है।