आईआईटी और बिट्स पिलानी में नहीं मिला दाखिला, उसी बिट्स ने गौरव खेत्रपाल को दिया अवॉर्ड
तीन बार जेईई में नाकाम रहे गौरव खेत्रपाल को जयपुर के पूर्व छात्र कार्यक्रम में बिट्स पिलानी ने स्टार्टअप एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया।
इंजीनियरिंग पढ़ने वाले हर स्टूडेंट का सपना होता है कि वह देश के नामी आईआईटी (IIT) या बिट्स पिलानी (BITS Pilani) जैसे इंस्टीट्यूट में पढ़े। लेकिन कई बार नाकामी हाथ लगती है, सपना अधूरा रह जाता है और मन टूट जाता है। गौरव खेत्रपाल की कहानी कुछ ऐसी ही है। शुरुआती नाकामी को पीछे छोड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज उसी संस्था से सम्मान भी हासिल किया है।
गौरव खेत्रपाल ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी यह प्रेरणा देने वाली कहानी शेयर की है। उन्होंने 1995 से 1997 के बीच तीन बार जेईई (JEE) की परीक्षा दी, लेकिन आईआईटी में उनका दाखिला नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने बिट्स पिलानी में दाखिले की कोशिश की। कटऑफ से 0.5 टक्के से भी कम नंबर रह जाने की वजह से वहां भी उनका सपना पूरा नहीं हुआ।
बिट्स पिलानी में दाखिला न मिलने का उन्हें इतना बुरा लगा कि उसके बाद कोई भी उस संस्था का नाम ले, तो वे अपने कान बंद कर लेते थे।
आईआईटी और बिट्स पिलानी के दरवाजे बंद होने के बाद खेत्रपाल ने एक टियर-3 कॉलेज से आगे की पढ़ाई शुरू की। लेकिन उन्होंने इसे अपनी आखिरी मंजिल नहीं माना। अपने लक्ष्य से समझौता किए बिना वे कोशिश करते रहे। आगे चलकर उन्होंने एक लेटरल एंट्रेंस परीक्षा में टॉप किया, जिससे उन्हें टियर-2 कॉलेज में जाने का मौका मिला।
फिर उनकी जिंदगी में एक दिलचस्प मोड़ आया। जिस बिट्स पिलानी में 18 साल की उम्र में उन्हें दाखिला नहीं मिला था, उसी में उन्होंने 2002-03 में मास्टर डिग्री के लिए एडमिशन लिया। कभी जिस संस्था का नाम उन्हें अपनी नाकामी की याद दिलाता था, वही उनकी ऊंची पढ़ाई का अहम हिस्सा बन गई।
इस सफर का अगला पड़ाव और भी खास रहा। कुछ साल बाद जयपुर में हुए एक पूर्व छात्रों के कार्यक्रम में उन्हें 'स्टार्टअप एक्सीलेंस अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। Vanshiv Technologies में उनके और उनकी टीम के बेहतरीन काम के लिए उन्हें यह सम्मान मिला।
गौरव खेत्रपाल के इस सफर से साफ होता है कि कोई एक परीक्षा या कॉलेज की नाकामी किसी इंसान का पूरा भविष्य तय नहीं करती। जिद और मेहनत के दम पर इंसान किसी भी क्षेत्र में कामयाबी पा सकता है।