231 नर्सों के नियमितीकरण का प्रस्ताव सरकार को भेजा, हाई कोर्ट की अवमानना की चेतावनी के बाद मनपा हरकत में
नागपुर मनपा में लंबे समय से काम कर रहीं नर्सों को नियमित करने में देरी पर हाई कोर्ट की सख्ती के बाद मनपा ने अब प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है।
नागपुर मनपा में बरसों से नर्सों के तौर पर काम कर रही धरती मोरे और अन्य कर्मचारियों ने खुद को नियमित न किए जाने पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में याचिका दाखिल की थी। इन कर्मचारियों की शिकायत यह थी कि इतने लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद मनपा उनका नियमितीकरण नहीं कर रही।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने देखा कि मनपा की तरफ से इसमें बेवजह देरी की जा रही है, जिस पर कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दे दी। इसका नतीजा यह निकला कि मनपा ने अब हलफनामा देकर कोर्ट को बताया कि इन स्वास्थ्य कर्मचारियों को नियमित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है।
इस केस में याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता रवि सन्याल, राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त सरकारी वकील आशिरगड़े और मनपा की तरफ से अधिवक्ता जेमोनी कासट ने पैरवी की।
कोर्ट ने 21 सितंबर 2026 को जो आदेश दिया था, उसी के पालन में मनपा ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया। इस हलफनामे में साफ लिखा गया कि जो याचिकाकर्ता नियमितीकरण के लिए पात्र पाए गए हैं, उनका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया है। हलफनामे के साथ जरूरी दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए गए। जज अनिल पानसरे और जज निवेदिता मेहता ने यह हलफनामा और उससे जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर ले लिए।
हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल होने के बाद उसकी कॉपी याचिकाकर्ताओं के वकील को भी दी गई। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दस्तावेजों को पढ़ने और उसके बाद अपनी बात रखने के लिए कोर्ट से समय मांगा, जो कोर्ट ने उन्हें दे दिया।
सुनवाई में जब कोर्ट ने समयसीमा को लेकर आगे सवाल किए, तो मनपा की तरफ से स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा अधिकारी से निर्देश लेकर कोर्ट को साफ बताया गया कि नियमों की शर्तों के मुताबिक कुल 231 कर्मचारी नियमितीकरण के लिए पात्र पाए गए हैं। साथ ही मनपा ने कोर्ट को यह भरोसा भी दिलाया कि इन 231 पात्र कर्मचारियों का प्रस्ताव जल्द ही राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खासतौर पर यह बात रेखांकित की कि मनपा अधिकारियों की इस देरी और ढिलाई को न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत देखा जा रहा है। हाई कोर्ट के इस साफ इशारे के बाद कि मामले में अवमानना कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है, मनपा के अधिकारियों को मामले की गंभीरता का एहसास हुआ और उन्होंने प्रस्ताव भेजने में तेजी दिखाई।