17 साल पुराने मानहानी केस में उद्धव ठाकरे, शिंदे समेत चारों बरी, कल्याण कोर्ट का फैसला
2009 के CD विवाद से जुड़े मानहानी मामले में कल्याण कोर्ट ने उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, आनंद परांजपे और रमाकांत देवळेकर को निर्दोष करार दिया।
दिवंगत नेता वसंत डावखरे के मानहानी केस में आखिरकार 17 साल बाद फैसला आ गया है। कल्याण कोर्ट ने 23 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाते हुए उद्धव ठाकरे, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पूर्व सांसद आनंद परांजपे और रमाकांत देवळेकर, इन चारों को निर्दोष करार दिया।
यह पूरा मामला 2009 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। उस वक्त कल्याण लोकसभा सीट पर वसंत डावखरे और आनंद परांजपे के बीच सीधी टक्कर थी। 22 अप्रैल 2009 को परांजपे के प्रचार के लिए एक सभा हुई थी, जिसमें उस वक्त शिवसेना के कार्याध्यक्ष रहे उद्धव ठाकरे ने डावखरे से जुड़ा बताया गया एक वीडियो या CD सबके सामने दिखाया था।
कल्याण पूर्व के कोळसेवाडी इलाके में हुई इस शिवसेना की प्रचारसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस की तरफ से वसंत डावखरे और शिवसेना की तरफ से आनंद परांजपे मैदान में थे। दिखाए गए इस वीडियो में डावखरे यह कहते दिख रहे थे कि कार्यकर्ता चुनाव जीतने के लिए पुलिस और चुनाव अधिकारियों से डरे बिना काम करें।
डावखरे ने उस वीडियो में दिख रहे बयान को अपना मानने से इनकार कर दिया था। उनका आरोप था कि वीडियो को चुन-चुनकर एडिट किया गया और इसका इस्तेमाल उनकी बदनामी करने के लिए किया गया। इसी आरोप के बाद उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे, आनंद परांजपे और रमाकांत देवळेकर के खिलाफ मानहानी का केस कोर्ट में दायर हुआ था।
करीब 17 साल तक चले इस केस में 20 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज हुए थे। आरोपियों की तरफ से लगातार इन आरोपों को नकारा जाता रहा। पूरी कोर्ट प्रक्रिया पूरी होने के बाद 23 सितंबर को अंतिम फैसला सुनाया गया, जिसमें चारों को बरी कर दिया गया। इसके साथ ही 2009 के चुनाव से जुड़ा यह लंबा कानूनी मामला अब कोर्ट के स्तर पर खत्म हो गया है।
फैसले के बाद आनंद परांजपे ने राहत जताई। उन्होंने कहा कि पिछले 17 साल से यह केस चल रहा था और अब जाकर उन्हें न्याय मिला है। परांजपे ने यह भी कहा कि वसंत डावखरे उस वक्त भी उनके लिए आदर के काबिल थे और आज भी हैं।