गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:04 IST

13 सितंबर को क्यों मनाते हैं पॉजिटिव थिंकिंग डे, जिंदगी बदलने वाली 5 आदतें जानिए

तनाव और डिप्रेशन के इस दौर में हर साल 13 सितंबर को सकारात्मक सोच का दिन मनाया जाता है, जो जिंदगी जीने का नजरिया बदलने की सीख देता है

13 सितंबर को क्यों मनाते हैं पॉजिटिव थिंकिंग डे, जिंदगी बदलने वाली 5 आदतें जानिए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आज की भागदौड़ और कॉम्पिटिशन भरी जिंदगी में डिप्रेशन, तनाव और चिंता जैसी दिक्कतें आम आदमी को घेरे हुए हैं। ऐसे माहौल में पॉजिटिव सोच अब सिर्फ एक ख्याल नहीं रह गई, बल्कि जीने के लिए जरूरी चीज बन गई है। यही वजह है कि हर साल 13 सितंबर को दुनियाभर में सकारात्मक विचार दिन मनाया जाता है, ताकि लोगों को उम्मीद की एक किरण दिखाई जा सके। इसकी शुरुआत साल 2003 में अमेरिका के एक बिजनेसमैन ने की थी। मकसद यही था कि लोग नेगेटिविटी के जाल से बाहर निकलें और अपने अंदर की पॉजिटिव एनर्जी को पहचानें।

दरअसल दिमाग में आने वाला हर ख्याल सीधे हमारे इमोशंस और हमारे कामकाज पर असर डालता है। अगर लगातार बुरा सोचते रहें या फेल होने का डर मन में बिठाए रखें, तो वही नेगेटिविटी रोजमर्रा के काम में भी झलकने लगती है। इसके उलट, मुश्किल वक्त में भी उम्मीद की किरण ढूंढने की आदत आगे बढ़ने की हिम्मत देती है। इसलिए 13 सितंबर का दिन हर किसी को अपनी सोच पर दोबारा नजर डालने और जिंदगी को नए नजरिए से देखने का मौका देता है।

पॉजिटिव सोच का मतलब सिर्फ चेहरे पर झूठी मुस्कान चिपकाना या मुसीबतों को नजरअंदाज करना नहीं है, बल्कि हकीकत को स्वीकार करके उसका हल ढूंढना है। कई मेडिकल और मानसिक स्टडीज में यह साबित हो चुका है कि जो लोग पॉजिटिव नजरिया रखते हैं, उनकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ बाकियों से काफी बेहतर रहती है।

सबसे पहला फायदा है मेंटल स्ट्रेस और डिप्रेशन से राहत। पॉजिटिव सोच से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल कम होता है, जिससे चिंता, डिप्रेशन और मानसिक थकान दूर होने में मदद मिलती है। दूसरा फायदा फिजिकल हेल्थ में सुधार का है, जिन लोगों की सोच रेगुलर पॉजिटिव रहती है उनमें हार्ट अटैक का खतरा घटता है और ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। तीसरा, इम्यूनिटी और लंबी उम्र, पॉजिटिव मानसिकता से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है और उम्र भी बेहतर होती है। चौथा फायदा है आत्मविश्वास और रिश्तों में सुधार, खुद पर भरोसा रखने से फैसले लेने की क्षमता बढ़ती है और पॉजिटिव एनर्जी वाले लोगों की तरफ बाकी लोग जल्दी खिंचे चले आते हैं, जिससे घर और काम दोनों के रिश्ते मजबूत होते हैं।

अब बात करते हैं रोजमर्रा की जिंदगी में पॉजिटिविटी लाने वाली 5 आसान आदतों की। नेगेटिव सोच को एकदम से रोकना मुश्किल लग सकता है, लेकिन प्रैक्टिस और सही आदतों से सोच में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। पहली आदत है शुक्रगुजार रहना, रोज सुबह उठते ही या रात को सोने से पहले जिंदगी में मिली कम से कम तीन अच्छी चीजों का शुक्रिया अदा करें, इससे दिमाग कमी ढूंढने की बजाय जो है उसी में खुश रहना सीखता है। दूसरी आदत है नेगेटिव सेल्फ-टॉक को बदलना, जब भी मन में आए "मुझसे यह नहीं होगा", तुरंत उसे बदलकर खुद से कहें "मैं इसे सीखने की कोशिश करूंगा"। तीसरी आदत है पॉजिटिव लोगों के साथ रहना, क्योंकि आसपास के लोगों का हमारी सोच पर गहरा असर पड़ता है, इसलिए हमेशा शिकायत करने वाले या ताने मारने वाले लोगों से थोड़ा दूर रहकर खुशमिजाज और मोटिवेट करने वाले लोगों के साथ वक्त बिताएं। चौथी आदत है मेडिटेशन और माइंडफुलनेस, रोज 10 से 15 मिनट ध्यान करने से मन शांत होता है और भूतकाल या भविष्य की टेंशन की बजाय वर्तमान में जीने की आदत लगती है। पांचवीं आदत है छोटी-छोटी कामयाबियों का जश्न मनाना, काम की जगह हो या पर्सनल लाइफ, मिली छोटी सफलता के लिए खुद की तारीफ करना सीखें, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और नई चुनौतियों से निपटने की ताकत मिलती है।

कुल मिलाकर, पॉजिटिव थिंकिंग डे सिर्फ एक दिन का जश्न नहीं है, बल्कि जिंदगी जीने के तरीके में पॉजिटिव बदलाव की शुरुआत है। जिंदगी में आने वाली मुश्किलों से डरने की बजाय अगर उन्हें सीखने का मौका मानकर देखा जाए तो हर मुसीबत का हल निकल सकता है। आज के दिन नेगेटिविटी को छोड़कर खुद में और समाज में उम्मीद की नई एनर्जी फैलाने का संकल्प लिया जा सकता है।

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